विश्वविद्यालय के छात्र पारस प्रताप सिंह ने ग्रामीण विकास और शिक्षा, जल संरक्षण के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया

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सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के ग्रामीण विकास (एम.ए.) के छात्र पारस प्रताप सिंह को दो दिवसीय आईआईटी कानपुर – पीएएस द्वारा आयोजित “ग्रामीण भारत शिखर सम्मेलन” में आमंत्रित किया गया था। पारस प्रताप सिंह ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित ताज महल होटल में आयोजित सम्मेलन के पहले दिन ग्रामीण – सामाजिक विकास, शिक्षा, जल संरक्षण और आदिवासी समुदायों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को रखा।

इस अवसर पर पारस प्रताप सिंह ने बताया कि स्थायी ग्रामीण विकास केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, इसके लिए स्थानीय भागीदारी करके जमीनी स्तर पर सामूहिक पुरुषार्थ करने की आवश्यकता है। हम देशभर के विशेषज्ञों, संस्थाओं और सहयोगियों से जुड़कर एक ऐसा समतामूलक, शिक्षित, आत्मनिर्भर, संवेदनशील और समृद्ध समाज बनाना चाहते हैं जहाँ किसी भी व्यक्ति का भविष्य उसकी आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक परिस्थितियों से निर्धारित न हो, बल्कि उसे अपनी प्रतिभा और पुरुषार्थ के बल पर आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों। हमारा सपना है कि प्रत्येक गाँव अपने संसाधनों, ज्ञान तथा सामूहिक सहभागिता से विकास की नई दिशा तय करे।

इस दौरान पारस प्रताप सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार के सहकारिता राज्य मंत्री श्री जयेंद्र प्रताप सिंह राठौर, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आईएएस दुर्गा शंकर मिश्र तथा आईआईटी कानपुर के प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी (डीन, कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी) सहित समिट में पुनर्योजी कृषि, जल एवं ऊर्जा प्रबंधन तथा जलवायु परिवर्तन के शमन एवं अनुकूलन पर देश-विदेश के विशेषज्ञ और जमीनी कार्यकर्ता से मुलाकात की और ग्रामीण विकास, शिक्षा एवं जल संरक्षण से जुड़े विषयों पर चर्चा की।

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