फाइबर-ऑप्टिक तकनीक और कुशल हाथों का कमाल: बीएमसी में जबड़े की हड्डियों के जुड़ाव का सफल ऑपरेशन

फाइबर-ऑप्टिक तकनीक और कुशल हाथों का कमाल: बीएमसी में जबड़े की हड्डियों के जुड़ाव का सफल ऑपरेशन

तीन साल बाद खुला मासूम का मुंह, टी एम जे एंकायलोसिस’ सर्जरी

सागर, 11 फ़रवरी, 2026 बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) के डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवाया है। संस्थान के डेंटल और एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने 9 साल के एक मासूम बच्चे का सफल ऑपरेशन कर उसे टेम्पोरो-मैंडिबुलर जॉइंट (TMJ) एंकायलोसिस जैसी गंभीर स्थिति से निजात दिलाई है। बच्चा पिछले तीन वर्षों से अपना मुंह नहीं खोल पा रहा था।

नौ वर्षीय बालक का 3 साल से मुंह बंद था, वह केवल लिक्विड डाइट पर निर्भर था। थ्री डी सी टी स्कैन में जबड़े की हड्डियों का आपस में जुड़ना (TMJ एंकायलोसिस) पाया गया।
ऑपरेशन के तुरंत बाद बच्चा 30 मिमी से अधिक मुंह खोलने में सक्षम हुआ।

चुनौतीपूर्ण थी सर्जरी और एनेस्थीसिया
चूंकि बच्चे का मुंह पूरी तरह बंद था, इसलिए सामान्य तरीके से बेहोश करना (Intubation) असंभव था। डॉ. शशि वाला के नेतृत्व में एनेस्थीसिया टीम ने ‘नेजल फाइबर-ऑप्टिक इंट्यूबेशन’ जैसी विशेष तकनीक का उपयोग कर इस बाधा को पार किया।
सर्जरी डॉ. श्वेता भटनागर और उनकी टीम द्वारा अत्यंत सटीकता के साथ की गई। ऑपरेशन के बाद डॉ. सर्वेश जैन की देखरेख में आई सी यू में रखने के बाद बच्चे को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।
बीएमसी डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने कहा कि ऑपरेशन के तुरंत बाद हमें अपेक्षित परिणाम मिले हैं। अब नियमित फिजियोथेरेपी से बच्चे की स्थिति में और भी बेहतर सुधार होगा।
मीडिया प्रभारी डॉ सौरभ जैन ने बताया कि इस सफल सर्जरी के बाद अब वह बच्चा तरल आहार की मजबूरी से निकलकर सामान्य भोजन कर सकेगा और स्पष्ट रूप से बोल पाएगा। परिजनों ने मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ (सुश्री प्रियंका) का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

यह सफलता दर्शाती है कि अब जटिल मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के लिए मरीजों को बड़े महानगरों की ओर भागने की जरूरत नहीं है। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध यह विशेषज्ञ सुविधा स्थानीय मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

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