
विवेकानंद जी ने भारत के कल्याण के लिए उस समय जो स्वप्न देखा था उसे हम सभी को मिलकर पूरा करना है – शैलेन्द्र जैन
स्वामी विवेकानंद ने विश्व में भारतीय संस्कृति की ध्वजा पताका फहराकर अपने ओजस्वी विचारों से युवाओं में राष्ट्र निर्माण की नई चेतना जगाई – प्रो सरोज गुप्ता
म प्र जन अभियान परिषद् जिला सागर एवं विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा सागर के तत्वाधान में विवेकानंद जयंती का आयोजन जिला पंचायत सभागार में किया गया।
सागर।’स्वामी विवेकानंद का जीवन एवं सन्देश’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर विधायक शैलेन्द्र जैन ने कहा कि विवेकानंद जी ऐसे युवा महापुरुष थे जिनका पूरी दुनिया लोहा मानती थी, विश्वधर्म सम्मेलन में स्वामी जी के ऐतिहासिक भाषण के बाद भारत के प्रति पूरी दुनिया के देशो की विचारधारा बदल गयी और विश्व के सभी देश भारत की तरफ आशाभरी निगाहो से देखने लगे l उन्होंने कहा जो स्वप्न विवेकानंद जी ने भारत के कल्याण के लिए उस समय देखा था उसे हम सभी को मिलकर पूरा करना है तभी उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजली होगी lस्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था. भारत में उनके जन्मदिन को युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है. उन्होंने रामकृष्ण मठ, रामकृष्ण मिशन और वेदांत सोसाइटी की नींव रखी थी. स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। जब भारत देश रूढ़ीवादी परम्पराओं में विश्वास कर अशिक्षा के लिए जाना जाता था। उस समय पूरे विश्व में स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों के माध्यम से भारत देश कोे गौरान्वित किया और देश में व्याप्त कुरितियों, रूढ़ीवादी परम्पराओं से लोगों को निकालकर शिक्षा की अलग जगाई। नरेन्द्रनाथ से स्वामी विवेकानंद बने ऐसे महापुरूष के विचारों को आत्मसाथ कर युवाओं को अग्रसर रहकर देश के हित में कार्य करना चाहियें। स्वामी विवेकानंद एक सच्चे राष्ट्रभक्त थे और उनका देशप्रेम किसी से छिपा नहीं है. वह लोगों की मदद करने से कभी भी पीछे नहीं हटते थे, बल्कि लोगों की सेवा करने को वह ईश्वर की पूजा करने के बराबर मानते थे. स्वामी विवेकानंद आज भी करोड़ों युवाओं को प्रेरणा देते हैं. उनके अनमोल विचारों से इंसान काफी कुछ सीख सकता है। युवाओं को उनके विचारों को आत्मसाथ कर ऊर्जा के साथ दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ कार्य करना चाहियें, जिससे युवाओं को निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। युवा देश के भविष्य हैं, युवाओं को स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उनके विचारों को आत्मसाथ कर देश हित में और समाज हित में ऊर्जा, कर्मठता, लगन एवं निरभिकता के साथ उनके बताये मार्ग पर चलकर कार्य करें, जिससे निश्चित रूप से युवाओं को सफलता प्राप्त होगी।
स्वागत उद्बोधन जिला समन्वयक केके मिश्रा ने दिया। केंद्र के नगर प्रमुख गौरव सिंह राजपूत ने जिनके ओजस्वी वचनों से गूंज उठा था विश्व गगन गीत का ओजपूर्ण गायन किया। केंद्र परिचय विभाग संपर्क प्रमुख नीलरतन पात्रा ने, विवेक वाणी की प्रस्तुति बसंत प्रजापति ने दी। केंद्र के चंद्रप्रकाश शुक्ला ने तीन ओमकार प्रार्थना करवाई l
शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित युवा भवदीप दुबे को स्वामी विवेकानंद सम्मान से सम्मानित किया गया।
मुख्य वक्ता शासकीय महाविद्यालय की हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सरोज गुप्ता ने कहा की स्वामी विवेकानंद संकल्पशील विचारों,ऊर्जस्वित शक्ति, अध्यात्म और आत्मविश्वास के ऐसे युगपुरुष शक्ति पुंज थे , जिन्होंने भारत ही नहीं पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति की ध्वजा पताका फहराई और अपने ओजस्वी विचारों से युवाओं में राष्ट्र निर्माण की नई चेतना जगाई। कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” के भाव से ओतप्रोत होकर युवाओं का आलस्य दूर करते हुए कहा कि जब सभी पुरुष और नारी मिलकर हजारों की संख्या में संगठित होकर व्यापक विचार क्रांति अभियान प्रारंभ करेंगे तथा अग्नि की तरह हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक सम्पूर्ण भारत और विश्व में फैलकर भारत को प्रतिष्ठापित करेंगे तभी सद्विचारों से जनमानस की जब सोच बदलेगी, विचार बदलेंगे तब भारत में एक नयी विवेकानन्दी क्रांति घटित होगी। रामराज्य की परिकल्पना साकार होगी।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जन अभियान परिषद् के संभाग समन्वयक दिनेश उमरिया ने कहा कि युवा उम्र से नहीं ऊर्जा से हुआ करते है, 70 बर्ष का व्यक्ति भी युवा है अगर उसके जीवन में ऊर्जा, उमंग और उत्साह है l
कार्यक्रम की दूसरी विशिष्ट अतिथि वाल्मीकि समाज की अध्यक्ष भारती करोसिया ने कहा की हम सभी को विवेकानंद की पुस्तकों का अध्ययन कर उनके पदचिन्हों पर चलना चाहिए l
अध्यक्षता कर रहे डॉ हरिसिंह गौर विवि भूगोल विभाग के सेवानिवृत प्रो संतोष शुक्ला ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के जीवन में नकारात्मकता थी ही नहीं इसी तरह हम सभी को इस जीवन पथ पर सफलता प्राप्त करनी है तो हमें अपने जीवन में सकारात्मक विचारो को आत्मसात करना होगा l धर्मेन्द्र शर्मा जी ने भी संबोधित किया।
संचालन केंद्र के संपर्क प्रमुख डॉ आशीष द्विवेदी ने किया। आभार गजेंद्र सिंह ने माना। शांति मंत्र केंद्र के संस्कार बर्ग शिक्षक शतांशु पात्रा ने किया।
इस अवसर पर दिनेश कुमार उमरैया,के के मिश्रा,ज्ञानचंद जैन,ओमप्रकाश दुबे,विनय मिश्रा,अंबिका यादव,डा सुमित रावत,धर्मेंद्र शर्मा,डा जी एल दुबे,सुबोध ताम्रकार,चंद्रेश शुक्ला,प्रदीप शुक्ला,रिंकू नामदेव,प्रशांत जैन,सुप्रिया नवाथे,भवदीप प्रकाश दुबे,राजेश त्रिवेदी सहित विवेकानंद केंद्र के सभी दायित्वान कार्यकर्ता व जन अभियान परिषद के सभी ब्लॉक समन्वयक, परामर्शदाता, नवांकुर, प्रस्फुटन समिति के कार्यकर्ता सीएमसीएलडीपी के छात्र और नगर के प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे











