मुक्तिधाम सौन्दयकरण कार्य रोके जाने के विरोध में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन आज से

मुक्तिधाम सौन्दयकरण कार्य रोके जाने के विरोध में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन आज से
निर्माण कार्यो पर बुल्डोजर कार्रवाई का मामला, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

देवरीकलाँ। देवरी नगर के झुनकू वार्ड स्थित मुक्तिधाम में विगत 04 अप्रैल को प्रशासन द्वारा की गई बुल्डोजर के विरोध में चल रहा सत्याग्रह अब अनिश्चितकालीन आमरण अनशन के चरण में पहुँच गया है। भाजपा मंडल अध्यक्ष की शिकायत पर कार्रवाई कर स्थानीय प्रशासन द्वारा जन सहभागिता से चल रहे मुक्तिधाम सौंदर्यकरण कार्य को रोके जाने एवं निर्माणाधीन फाउन्डेशन ध्वस्त किये जाने के बाद से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। मौन जुलूस एवं धरना प्रदर्शन के बाद नागरिकों द्वारा स्थानीय नगरपालिका चौराहे पर क्रमिक भूख हड़ताल के बाद अब अनिश्चितकालीन आमरण अनशन प्रारंभ हो रहा है

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग एवं 4 सूत्रीय मांगों के समर्थन में स्थानीय नगरपालिका चौराहे पर चल रही क्रमिक भूख हड़ताल के अंतिम दिवस राजा गुप्ता, रामप्रसाद कोष्टी, प्रकाश कोष्टी
हड़ताल पर बैठे जिनके समर्थन में मुक्तिधाम समिति सदस्यों एवं नगर के समाजसेवियों ने साथ बैठ कर हौसला आफजाई की। इस दौरान नगर के बुद्धिजीवियों ने सत्याग्रह के प्रति समर्थन व्यक्त किया एवं नगर विकास को लेकर अपने विचार व्यक्त किये।

जनसहभागिता के लिए सत्याग्रह का पहला मामला-
शायद पहला मामला होगा जब सार्वजनिक हित के सामुदायिक विकास और सौन्दर्याकरण कार्यों में जनभागीदारी करने के लिए नागरिकों द्वारा सत्याग्रह किया जा रहा है। इसके विपरीत मामले में शासन-प्रशासन जन सहयोग की राशि और श्रमदान से निर्मित संरचनाओं पर बुल्डोजर चलाने पर आमादा है। दर असल सार्वजनिक हित के जनकल्याणकारी कार्यों एवं सरकारी योजनाओं में जनसहभागिता आपेक्षित होती है इसी अवधारणा को लेकर स्वयंसेवी संघठनों एवं जनभागीदारी समितियों का गठन किया जाता है। मौजूदा प्रदेश की भाजपा सरकार भी जनसहभागिता की हिमायती है जिसके चलते प्रदेश में जनअभियान परिषद के माध्यम से प्रदेश के स्वयंसेवी संगठनों, महिला ईकाईयों, स्कूली छात्र-छात्राओं को सार्वजनिक हित के अभियानों से जोड़ा गया है।
ऐसे में देवरी नगर में स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई शासन और प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है।

मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारी चुप-
सियासी इशारे पर प्रशासन द्वारा की गई नाटकीय कार्रवाई के बाद अब मामले में प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे हुए है, नागरिकों द्वारा मौन जुलूस, घरना एवं भूख हड़ताल के माध्यम से अपने इरादे जाहिर कर दिये है। वह प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपनी माग पूरी किये जाने को लेकर आंदोलनरत है। वही मामले में प्रशासनिक अधिकारी पूर घटनाक्रम से कन्नी काटते नजर आ रहे है।
क्रमिक भूख हड़ताल के अंतिम दिवस नंदू रैकवार, मोहनलाल रैकवार, जीवन रैकवार, बलराम रैकवार, रजनीश रैकवार, जितेंद्र रैकवार, शुभम रैकवार, मिट्ठूलाल रैकवार, हर्षित रैकवार, गंगाराम रैकवार, छुट्टन गुरु, अनंतराम दुबे, शारदा प्रसाद दुबे, हुकुम कोष्टी, दुलीचंद कोष्टी, पप्पू नामदेव, नंदू सोनी, नर्मदा वाल्मीकि, हरि बाल्मीकि, संजय वर्मा, विजय धानक सहित अन्य लोग मौजूद रहे

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