ठगों के नए हथकंडों का किया खुलासा, CSC केंद्रों पर पहुंची सागर पुलिस, सैकड़ों नागरिकों को दिए साइबर सुरक्षा के मंत्र

‘SAFE CLICK 2.0’ अभियान का तीसरा दिन

ठगों के नए हथकंडों का किया खुलासा, CSC केंद्रों पर पहुंची सागर पुलिस, सैकड़ों नागरिकों को दिए साइबर सुरक्षा के मंत्र

सागर, दिनांक 26 जून 2026

पुलिस मुख्यालय, मध्यप्रदेश द्वारा संचालित “SAFE CLICK 2.0 – सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित भविष्य” अभियान के तृतीय दिवस पर सागर पुलिस ने साइबर अपराधों के विरुद्ध अपनी जन-जागरूकता मुहिम को और अधिक प्रभावी बनाया। पुलिस अधीक्षक  अनुराग सुजानिया के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीना  जयवीर सिंह भदौरिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर  नरेंद्र सोलंकी एवं जिले के समस्त राजपत्रित अधिकारियों के मार्गदर्शन में जिले के सभी थाना क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान संचालित किया गया।

अवकाश होने के कारण इस दिवस का मुख्य फोकस कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) रहे, जहां पुलिस टीमों ने पहुंचकर CSC संचालकों एवं आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया। अभियान के दौरान सागर पुलिस ने सैकड़ों नागरिकों को साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए-नए हथकंडों से अवगत कराया तथा डिजिटल सुरक्षा के व्यावहारिक उपाय बताए।

CSC संचालकों को दिए विशेष सुरक्षा निर्देश

पुलिस अधिकारियों ने CSC संचालकों को निर्देशित किया कि प्रत्येक डिजिटल लेन-देन से पूर्व ग्राहक का सत्यापन सुनिश्चित करें, सभी लेन-देन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, CCTV फुटेज कम से कम 30 दिनों तक संरक्षित रखें तथा अपनी CSC ID, पासवर्ड एवं बायोमेट्रिक डिवाइस किसी भी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करें।

इन साइबर अपराधों के प्रति किया गया विशेष रूप से जागरूक

  • डिजिटल अरेस्ट के नाम पर वीडियो कॉल कर डराने वाले गिरोह।
  • KYC अपडेट एवं बैंक खाता बंद होने का झांसा देकर ठगी।
  • OTP, UPI PIN एवं स्क्रीन शेयरिंग के माध्यम से बैंक खाते खाली करना।
  • ऑनलाइन निवेश (Investment), टास्क फ्रॉड एवं ट्रेडिंग ऐप के जरिए अधिक मुनाफे का लालच।
  • फर्जी लोन ऐप, पार्ट टाइम जॉब, वर्क फ्रॉम होम एवं सोशल मीडिया फ्रॉड।
  • QR Code स्कैन कराकर या पेमेंट रिक्वेस्ट भेजकर की जाने वाली ठगी।
  • AnyDesk, TeamViewer एवं अन्य रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड कराकर मोबाइल का नियंत्रण प्राप्त करने वाले साइबर अपराधी।
  • AI आधारित फर्जी वीडियो एवं आवाज (Deepfake) के माध्यम से रिश्तेदार या अधिकारी बनकर ठगी के नए तरीके।

पुलिस ने बताया ठगों के तीन सबसे बड़े हथियार

पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों को समझाया कि साइबर अपराधी सामान्यतः डर, लालच और जल्दबाजी का सहारा लेते हैं। यदि कोई व्यक्ति पुलिस, CBI, ED, बैंक अधिकारी या किसी सरकारी संस्था का अधिकारी बनकर फोन अथवा वीडियो कॉल पर तत्काल पैसे जमा करने या गोपनीय जानकारी साझा करने का दबाव बनाता है, तो वह साइबर ठगी हो सकती है।

ये सावधानियां अपनाने की दी सलाह

  • OTP, ATM PIN, CVV एवं UPI PIN किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें।
  • किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांच लें।
  • QR Code स्कैन केवल पैसा भेजने के लिए होता है, पैसा प्राप्त करने के लिए नहीं।
  • सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले निवेश, लॉटरी या इनाम संबंधी आकर्षक ऑफरों पर विश्वास न करें।
  • मोबाइल या बैंकिंग ऐप में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर केवल आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन का ही उपयोग करें।

पेम्पलेट वितरण एवं हेल्पलाइन की जानकारी

अभियान के दौरान साइबर सुरक्षा संबंधी पेम्पलेट वितरित किए गए तथा नागरिकों को साइबर हेल्पलाइन 1930 एवं राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in की जानकारी देकर साइबर अपराध होने की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही सभी नागरिकों से अपील की गई कि साइबर ठगी होने पर बिना देर किए बैंक को सूचित करें और हेल्पलाइन पर तुरंत संपर्क करें, क्योंकि शुरुआती समय में शिकायत दर्ज होने पर धनराशि वापस मिलने की संभावना अधिक रहती है।

सागर पुलिस की अपील

सागर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल, लिंक, QR Code, निवेश योजना या ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन विश्वास न करें। स्वयं जागरूक रहें और अपने परिवार, मित्रों एवं आसपास के लोगों को भी साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करें।

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