
अग्रणी महाविद्यालय में त्रिवसीय प्रवेश उत्सव : प्रख्यात शायर अशोक मिज़ाज़ के प्रेरक विचारों से ऊर्जामय हुआ सभागार
स्वर्णिम भविष्य की नींव है कॉलेज जीवन, यहां बिताया एक-एक पल कीमती: प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता
ऊंचे लक्ष्य तय करें और संघर्षों से न घबराएं: प्रख्यात शायर अशोक मिज़ाज़ ‘ बद्र ‘
सागर। शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित तीन दिवसीय ‘दीक्षारंभ एवं प्रवेश उत्सव’ के दूसरे दिन गुरुवार को भी छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह देखा गया। प्राचार्य डॉ सरोज गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रख्यात शायर और कवि अशोक मिजाज बद्र प्रेरक वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। कार्यक्रम में विभिन्न प्राध्यापको ने महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों से छात्र-छात्राओं को अवगत कराया।
सत्र की शुरुआत में अतिथियों का आत्मीय स्वागत कार्यक्रम संयोजक डॉ. अभिलाषा जैन एवं डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने किया। इस बेहद रोचक, ज्ञानवर्धक और गरिमापूर्ण कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन डॉ. प्रज्ञा दुबे ने किया। द्वितीय दिवस के सफल सत्र के समापन पर महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. संदीप सबलोक ने उपस्थित सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और बड़ी संख्या में मौजूद छात्र-छात्राओं का सहृदय आभार व्यक्त किया।
स्वर्णिम भविष्य की नींव है कॉलेज जीवन, यहां बिताया एक-एक पल कीमती: प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता
सत्र के प्रथम क्रम में नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने सफलता का मूलमंत्र दिया। उन्होंने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि कॉलेज जीवन विद्यार्थियों के स्वर्णिम भविष्य की नींव होता है, जहाँ बिताया गया एक-एक पल कीमती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से समय का सदुपयोग करने और जीवन में एक निश्चित लक्ष्य लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। प्राचार्या ने विशेष बल देते हुए कहा कि विद्यार्थी खुद को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रखें, बल्कि खेलकूद, एनसीसी और एनएसएस जैसी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, क्योंकि यही विधाएं आपके भीतर नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का संचार कर आपको एक जिम्मेदार नागरिक बनाती हैं।
ऊंचे लक्ष्य तय करें और संघर्षों से न घबराएं: प्रख्यात शायर अशोक मिज़ाज़ ‘ बद्र ‘
कार्यक्रम के मुख्य प्रेरक वक्ता और देश के प्रख्यात शायर व कवि अशोक मिज़ाज़ बद्र ने अपने चिरपरिचित ओजस्वी और प्रेरक अंदाज में नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने युवाओं को जीवन का फलसफा समझाते हुए कहा कि युवावस्था ऊर्जा का वो केंद्र है जो राष्ट्र का भाग्य बदल सकती है। युवाओं को अपने जीवन में ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए और राह में आने वाले कड़े संघर्षों से कभी नहीं घबराना चाहिए। उन्होंने अपनी चुनिंदा और प्रेरक कसीदों व बेहतरीन शायरी के माध्यम से विद्यार्थियों में ऐसा जोश भरा कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनका यह उद्बोधन युवाओं को करियर और जीवन के पथ पर आगे बढ़ने के लिए एक नई ऊर्जा दे गया।
हम ऐसा काम करें कि हमारा इतिहास दूसरे लिखें: डॉ. सुनील साहू
डॉ. सुनील साहू ने विद्यार्थियों को समय प्रबंधन और अनुशासन का कड़ा पाठ पढ़ाया। उन्होंने बेहद प्रेरणादायी अंदाज में कहा, “जिनको मंजिल का पता होता है, वही इतिहास लिखते हैं; लेकिन हमें ऐसा काम करना चाहिए कि हमारा इतिहास हम स्वयं नहीं, बल्कि दूसरे लोग लिखें।” उन्होंने महाविद्यालय की शैक्षणिक समय-सारणी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्रत्येक विषय के क्रेडिट स्कोर और उनकी समय अवधि पर चर्चा की। साथ ही उन्होंने बताया कि मेंटर योजना के तहत प्रत्येक शिक्षक को विद्यार्थियों के एक निश्चित समूह के अभिभावक की जिम्मेदारी दी गई है, जो उनकी हर समस्या का ध्यान रखेंगे।
रोचक क्विज, तनाव प्रबंधन और विभिन्न प्रकोष्ठों की दी गई जानकारियां
त्रिवसीय प्रवेश उत्सव के तहत आगे के क्रम में विभिन्न महत्वपूर्ण प्रकोष्ठों के प्रभारियों द्वारा विद्यार्थियों का व्यावहारिक मार्गदर्शन किया गया। युवा उत्सव प्रभारी डॉ. संगीता मुखर्जी ने लोक नृत्य, लोकगीत और क्ले मॉडलिंग सहित कुल 22 विधाओं की जानकारी देकर छात्रों को सहभागिता के लिए आमंत्रित किया। डॉ. प्रतिभा जैन के निर्देशन में शुभम दुबे ने स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तहत रोजगार की असीम संभावनाओं से अवगत कराया। वहीं, डॉ. अमर कुमार जैन ने कॉलेज यूनिफॉर्म की अनिवार्यता और महाविद्यालयीन आचार-विचार पर प्रकाश डाला। डॉ. अवधेश प्रताप सिंह व श्रीमती कीर्ति रैकवार ने एनएसएस एवं एनसीसी के माध्यम से राष्ट्र सेवा तथा डॉ. शुचिता अग्रवाल ने एक शानदार क्विज प्रतियोगिता का आयोजन कर विद्यार्थियों से कई रोचक सवाल पूछे और सही उत्तर देने वालों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया। इसके बाद डॉ. नीता यादव ने तनाव प्रबंधन पर चर्चा करते हुए मानसिक स्वास्थ्य को जैन धर्म के ’10 लक्षण व्रत’ से जोड़ा और बताया कि शारीरिक, मानसिक व सामाजिक स्वास्थ्य से ही राष्ट्र स्वास्थ्य संभव है।
वरिष्ठ प्राध्यापकों एवं शैक्षणिक स्टाफ की रही गरिमामय उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी आयोजन के दौरान महाविद्यालय का पूरा शैक्षणिक स्टाफ मुस्तैद रहा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ प्रतिभा जैन, डॉ. नीलम सिंह, डॉ. रेणु सोलंकी, अरविंद चतुर्वेदी, सुश्री अनुष्का राजे, डॉ. शालिनी परिहार सहित समस्त शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक स्टाफ उपस्थित रहा, जिन्होंने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में अपना सक्रिय सहयोग दिया।











