अग्रणी महाविद्यालय में ‘बुंदेलखंड: पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

अग्रणी महाविद्यालय में ‘बुंदेलखंड: पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

कुलगुरु प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर बोले— ‘गौर संग्रहालय बुंदेलखंड की ऐतिहासिक पहचान, पर्यटन स्थलों की स्वच्छता व प्रचार-प्रसार से युवाओं को मिलेंगे नए अवसर’

प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा— ‘सांस्कृतिक वैभव, लोककला और प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण बुंदेलखंड में पर्यटन की असीम संभावनाएं’

विद्वानों का महामंथन: धार्मिक, ऐतिहासिक व सांस्कृतिक पर्यटन के साथ लोक संस्कृति व धरोहरों को विकास योजनाओं से जोड़ने पर बल

स्व. डॉ. दिलीप राजपूत एवं स्व. डॉ. विजय त्रिपाठी की स्मृति में मेधावी छात्र-छात्राएं स्वर्ण पदक से सम्मानित; काव्य गोष्ठी के साथ हुआ संगोष्ठी का समापन

सागर/ पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर में पीएम-उषा परियोजना (सॉफ्ट कॉम्पोनेंट) के तृतीय सत्र की गतिविधि के अंतर्गत “बुंदेलखंड: पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफलता पूर्वक शुभारंभ किया गया।
संगोष्ठी का भव्य व गरिमामयी शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के कुलगुरु प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता, पीएम-उषा परियोजना प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अरुण तिवारी, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी रामकुमार गोस्वामी एवं आरोग्य भारती के जिला संयोजक डॉ सुखदेव मिश्रा द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर किया गया।

पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार कर रोजगार सृजन करें युवा: कुलगुरु प्रो. यशवंत सिंह

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर ने कहा कि डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय समूचे बुंदेलखंड की ऐतिहासिक पहचान है तथा विश्वविद्यालय स्थित ‘गौर संग्रहालय’ (गौर म्यूज़ियम) सभी के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं अंचलवासियों से आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्र के प्राकृतिक व ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों को स्वच्छ रखने का संकल्प लें तथा उनका व्यापक प्रचार-प्रसार करें, जिससे पर्यटन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नवीन अवसर विकसित हो सकें।

संस्कृति और लोकगीतों से समृद्ध है बुंदेलखंड की माटी: डॉ. सरोज गुप्ता

स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बुंदेलखंड ऋषि-मुनियों की पावन तपोभूमि, मधुर लोकगीतों, समृद्ध लोक संस्कृति तथा प्राकृतिक उदारता से परिपूर्ण अंचल है। इस क्षेत्र में धार्मिक, ऐतिहासिक और पारिस्थितिकी पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
इसके पश्चात पीएम-उषा परियोजना प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी ने परियोजना के उद्देश्यों एवं क्रियान्वयन की रूपरेखा प्रस्तुत की। भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार पर्यटन आधारित रोजगार सृजन हेतु प्रतिबद्ध है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अरुण तिवारी, अधिकारी रामकुमार गोस्वामी एवं डॉ सुखदेव मिश्रा ने भी स्थानीय धरोहरों व मेलों को पर्यटन विकास की योजनाओं से जोड़ने पर बल दिया। उद्घाटन सत्र का प्रभावी संचालन डॉ. प्रज्ञा दुबे एवं आभार प्रदर्शन डॉ. जय नारायण यादव ने व्यक्त किया।

प्रथम वैचारिक सत्र: ‘बुंदेलखंड में धार्मिक-आध्यात्मिक पर्यटन’

संगोष्ठी के प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. नीलिमा पिंपलापुरे ने कहा कि “Bundelkhand is the heartbeat of India” और वे अपनी टीम के साथ इसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने हेतु प्रयासरत हैं। सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार टीकाराम त्रिपाठी ने अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद के अज्ञात प्रवास व ऐतिहासिक संदर्भों को साझा किया। सुप्रसिद्ध लेखिका व समाजसेवी डॉ. शरद सिंह ने धार्मिक पर्यटन से रोजगार की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए जलंधर स्थित ज्वाला देवी मंदिर के विकास की बात कही। वहीं इंक मीडिया के निदेशक डॉ. आशीष द्विवेदी ने युवाओं को अपनी स्थानिकता से जुड़कर पर्यटन में नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया। इस सत्र का संचालन डॉ रेणु सोलंकी तथा आभार दो अभिलाषा जैन ने व्यक्त किया।

द्वितीय वैचारिक सत्र: ‘ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पर्यटन एवं शोध-पत्र वाचन’

द्वितीय सत्र की अध्यक्षता रीवा के समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. महेश शुक्ला ने की। मुख्य वक्ता डॉ. हरीसिंह गौर विवि के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. बी.के. श्रीवास्तव, डॉ. नागेश दुबे, डॉ. ललित मोहन एवं डॉ. अरुण कुमार शुक्ला ने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरोहरों, ऐरण जैसे पुरातात्विक स्थलों, लोककलाओं, मेलों, वनोपज और खनिज संसाधनों को सुनियोजित पर्यटन से जोड़कर वृहद रोजगार सृजित किया जा सकता है।
इस सत्र में शोधार्थियों ने बुंदेलखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों के आर्थिक महत्व, ग्रामीण पर्यटन, भू-पर्यटन (Geo-Tourism) एवं पारिस्थितिकी पर्यटन की संभावनाओं व चुनौतियों पर अपने शोध-पत्रों का वाचन किया। सत्र का संचालन डॉ. अवधेश प्रताप सिंह तथा आभार डॉ. रितु त्रिपाठी द्वारा व्यक्त किया गया।

स्व. डॉ. दिलीप राजपूत एवं स्व. डॉ. विजय त्रिपाठी की स्मृति में मेधावी प्रतिभाएं हुई स्वर्ण पदक से सम्मानित

राष्ट्रीय संगोष्ठी के गरिमामयी मंच से महाविद्यालय के पूर्व समर्पित प्राध्यापकों की पावन स्मृति में मेधावी विद्यार्थियों को ‘स्वर्ण पदक’, 5000 रु की प्रोत्साहन राशि एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व सहायक प्राध्यापक स्व. डॉ. दिलीप सिंह राजपूत की स्मृति में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अनुपमा राजपूत द्वारा प्रदत्त राशि से सत्र 2023-24 में अर्थशास्त्र में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर कु. कंचन मिश्राbतथा सत्र 2024-25 में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर कु. मुस्कान साहू को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
इसी क्रम में इतिहास विभाग के पूर्व प्राध्यापक स्व. डॉ. विजय त्रिपाठी की स्मृति में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मंजू त्रिपाठी द्वारा प्रदत्त राशि से सत्र 2023-24 में एम.ए. इतिहास में प्रथम स्थान अर्जित करने पर ऋतिक तिवारी एवं सत्र 2024-25 में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर भूमिका कटारिया को स्वर्ण पदक, नगद राशि व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

काव्य गोष्ठी के साथ संगोष्ठी का भव्य समापन

महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ संदीप सबलोक ने बताया कि संगोष्ठी के अंतिम चरण में एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। वरिष्ठ कवि प्रदीप पांडेय के कुशल संचालन में कानपुर से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अरुण तिवारी, नगर के साहित्यकार डॉ. नलिन जैन, लोक गायिका श्रीमती प्रमिला सागर एवं अमित आठ्या ने अपनी रचनाओं व काव्य-पाठ से समां बांध दिया। इस अवसर पर ‘श्यामलम्’ संस्था के संस्थापक वरिष्ठ साहित्यकार उमाकांत मिश्र सहित नगर के गणमान्य प्रबुद्धजन, साहित्यकार, महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में शोधार्थी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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