
ग्रामीणों का दावा—सस्ते दाम पर खुलेआम बिक रही कच्ची शराब, विरोध करने वालों को धमकाने और झूठे मुकदमों में फंसाने का भी आरोप


शाहगढ़/सागर। ग्राम पंचायत अमरमऊ के ग्रामीणों ने गांव में कथित रूप से लंबे समय से चल रहे अवैध कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री के साथ ही शासकीय पट्टे की जमीनों पर कथित अवैध कब्जों का मामला उठाया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन को संबोधित शिकायत तहसीलदार शाहगढ़ के माध्यम से सौंपते हुए मामले में तत्काल जांच कर निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत अमरमऊ और आसपास के क्षेत्रों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध रूप से कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री की जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कथित तौर पर शराब में खतरनाक रसायनों और केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है तथा इसे पॉलीथिन के पैकेटों में करीब 20 से 25 रुपये में बेचे जाने से गांव के युवा और किशोर भी इसके संपर्क में आ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार अवैध शराब के कारण क्षेत्र में घरेलू विवाद, अपराध और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है।
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में विजय कंजर और उसके सहयोगियों पर इस अवैध कारोबार से जुड़े होने के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि शिकायत के आधार पर नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है।
शिकायत में वर्ष 2020 में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ अधिकारियों से शिकायत किए जाने के बाद ग्रामीणों पर कथित रूप से झूठा मुकदमा दर्ज कराने का आरोप भी लगाया गया है। आवेदन के अनुसार 1 सितंबर 2020 को शिकायत के बाद थाना शाहगढ़ में अपराध क्रमांक 0288/2020 दर्ज हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले में जिला न्यायालय में चले प्रकरण क्रमांक 146/2024 में 10 आरोपियों को बरी किया जा चुका है। इस संबंध में न्यायालयीन अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
ग्रामीणों ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि आदिवासी समाज के लोगों की सरकारी पट्टे की जमीनों पर दबाव बनाकर कथित रूप से कब्जा किया जा रहा है। आवेदन में खसरा नंबर 2070/2, 2070/3, 2070/4 और 2070/5 का उल्लेख करते हुए इन जमीनों की मौके पर जांच कराने और यदि कब्जा पाया जाए तो नियमानुसार हटाने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकाया जाता है तथा पुलिस में शिकायत करने पर झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है।
ग्रामीणों ने शिकायत में कुछ व्यक्तियों के आपराधिक प्रकरणों का भी उल्लेख किया है। इन दावों की पुष्टि संबंधित पुलिस एवं न्यायालयीन रिकॉर्ड से किया जाना आवश्यक है। ग्रामीणों का कहना है कि कथित गतिविधियों के कारण गांव में भय का माहौल है और शिकायत करने वाले लोगों को प्रशासनिक संरक्षण की आवश्यकता है।
आवेदन में हाल के दिनों में बंडा क्षेत्र में कथित जहरीली शराब से हुई मौतों का उल्लेख करते हुए ग्रामीणों ने अवैध शराब के खिलाफ तत्काल अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में गंभीर जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि अमरमऊ और आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब के निर्माण एवं बिक्री की जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ आबकारी अधिनियम सहित संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी पट्टे की जमीनों की राजस्व अधिकारियों से जांच कराकर यदि अवैध कब्जे पाए जाते हैं तो नियमानुसार उन्हें हटाया जाए। शिकायतकर्ताओं ने धमकी और कथित दबाव की शिकायतों की भी जांच कर ग्रामीणों को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि मामले में निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक कार्रवाई होने से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था कायम रखने के साथ-साथ अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकेगा। अब ग्रामीणों की शिकायत पर संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी।











