
शिक्षकों की उपस्थिति व्यवस्था में गड़बड़ी के आरोप, जांच कर कार्रवाई की मांग
देवरी। सागर जिले के देवरी तहसील अंतर्गत महाराजपुर संकुल में शासकीय स्कूलों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि संकुल क्षेत्र के कई प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों की ई-अटेंडेंस के लिए ऐसी लोकेशन निर्धारित की गई हैं, जिनके कारण शिक्षकों की वास्तविक स्कूल परिसर में उपस्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
जानकारी के अनुसार महाराजपुर संकुल के अंतर्गत आने वाले छिंद, छगोड़ा, पुटदेही, अरसी, भरई, बंधा, सिमरिया, झमरा सहित अन्य स्कूलों की ई-अटेंडेंस के लिए संकुल स्तर पर लोकेशन निर्धारित किए जाने की बात सामने आई है। वहीं झमारा, रमखिरिया, अर्जुंदा आदि स्कूलों की लोकेशन शासकीय प्राथमिक शाला सिलकुही में निर्धारित होने की जानकारी भी सामने आई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस व्यवस्था का कुछ शिक्षक कथित रूप से दुरुपयोग कर रहे हैं। आरोप है कि कुछ शिक्षक निर्धारित लोकेशन से ई-अटेंडेंस लगाकर अपने कार्यस्थल से बाहर चले जाते हैं और शाम की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए दोबारा निर्धारित लोकेशन पर पहुंचते हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे ई-अटेंडेंस व्यवस्था के उद्देश्य पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
बीआरसी की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे मामले में देवरी बीआरसी हरिकृष्ण चौबे की भूमिका को लेकर भी शिकायतकर्ताओं द्वारा सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि उनकी जानकारी अथवा मिलीभगत से इस प्रकार की व्यवस्था संचालित हो रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ई-अटेंडेंस का उद्देश्य शिक्षकों की वास्तविक एवं समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करना है, लेकिन यदि स्कूल से अलग स्थानों को नियमित उपस्थिति के लिए लोकेशन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उच्च अधिकारियों से जांच की मांग
मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी सागर, डीपीसी सागर, कलेक्टर सागर एवं संभागायुक्त सागर से मांग की गई है कि महाराजपुर संकुल सहित देवरी विकासखंड के सभी संकुलों में ई-अटेंडेंस के लिए निर्धारित लोकेशन की जांच कराई जाए। साथ ही पिछले कुछ महीनों की ई-अटेंडेंस, जीपीएस लोकेशन एवं स्कूल में वास्तविक उपस्थिति का मिलान कराया जाए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या फर्जी उपस्थिति की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो विभाग द्वारा वास्तविक स्थिति सार्वजनिक कर भ्रम की स्थिति समाप्त की जाए।











