
सुंदरकांड पाठ के सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते
हैं।
१. सुंदरकांड वाल्मिकी जी द्वारा रचित रामायण का एक महत्वपूर्ण भाग है, उनके उपरांत तुलसीदास जी ने पंचम सोपान में सुंदरकांड की रचना काव्य में की ।
२. जो भी जातक (भक्त) सुंदर कांड का पाठ करता है उसे न केवल हनुमान जी बल्कि भगवान राम का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। हनुमान चालीसा हो या सुंदरकांड दोनों का ही पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करता है उसकी एकाग्रता में वृद्धि होती है और वह आत्मविश्वास से भर जाता है। जिस तरह अपनी शक्तियों को याद करके हनुमान जी ने बड़े-बड़े कार्यों का आसानी से पूरा कर दिया था।
- सुंदर काण्ड का पाठ मंगलवार तथा शनिवार के दिन करने से मंगल और शनि ग्रह शांत हो जाते हैं।शनि की ढैय्या ,साढ़ेसाती में भी आप कई परेशानियों से बच सकते हैं। इसके साथ ही राहु-केतु जैसे बुरे ग्रहों के दुष्परिणामों को दूर करने के लिये भी सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है।
- सुंदरकांड का पाठ यदि किसी विशेष फल की प्राप्ति के लिये कर रहे हैं तो शुरुआत मंगलवार या शनिवार के दिन से करें। कहा गया है भूत पिशाच कोई भी ऊपरी बाधा तथा नज़र उतारने के लिए भी हनुमान जी समुख पाठ बैठ कर दिया जला करना चाहिए।
5 सुंदरकांड में तीन श्लोक, साठ दोहे तथा पांच सौ छब्बीस चौपाइयां हैं । साठ दोहों में से प्रथम तीस दोहों में विष्णुस्वरूप श्री राम के गुणों का वर्णन है । सुंदर शब्द इस कांड में चौबीस चौपाइयों में आया है ।
६. सुन्दरकाण्ड प्रारम्भ करने के पहले हनुमानजी तथा श्री राम चन्द्र जी का आवाहन जरूर करें। जब सुन्दर कांड समाप्त हो जाये तो भगवान को भोग लगा कर ,आरती करके ,उनकी विदाई भी करे। एवं सम्पुट लगाये
सम्पुट-
राम सिया राम ,सिया राम जय जय राम ।
मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवहु सुदसरथ अचर बिहारी।।
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