
सहकार भारती की मासिक बैठक संपन्न, संगठन के उद्देश्य और सहकारिता आंदोलन पर डॉ. यतीश जैन ने डाला प्रकाश
काव्यायन संस्था ने डॉ. एम.एस. गौर के सम्मान में आयोजित किया भव्य काव्य पाठ एवं सम्मान समारोह
सागर। सहकार भारती की मासिक बैठक जिला कार्यालय बालक हिल व्यू कॉलोनी में आयोजित की गई। बैठक में सहकार भारती के पूर्व राष्ट्रीय मंत्री एवं संगठन समिति सदस्य डॉ. यतीश जैन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। डॉ. यतीश जैन का अल्पकालिक सागर प्रवास रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा सरस्वती वंदना, सहकार गीत एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। बैठक का संचालन सहकार भारती के जिला अध्यक्ष आलोक जैन ने किया।
मुख्य अतिथि डॉ. यतीश जैन ने सहकार भारती के संगठनात्मक स्वरूप, उद्देश्य, लक्ष्य एवं अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को संगठित कर आर्थिक एवं सामाजिक विकास की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा सकता है। उन्होंने संगठन की भूमिका और सहकारिता आंदोलन के महत्व पर भी कार्यकर्ताओं से संवाद किया।
बैठक में सहकार भारती के जिला संगठन प्रमुख अनूप गोयल, क्रेडिट प्रकोष्ठ के संभागीय अध्यक्ष भूपत सिंह मरकाम, क्रेडिट प्रकोष्ठ जिला प्रमुख बलराम पाराशर, स्व सहायता समूह प्रकोष्ठ जिला प्रमुख बी.पी. सिंह, जिला कार्यकारिणी सदस्य देवेंद्र कुर्मी भरदी, रामनिवास घोषी खमरिया, बाबू सिंह कुर्मी भरदी सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
डॉ. एम.एस. गौर के सम्मान में काव्य पाठ एवं सम्मान समारोह
इससे पूर्व होटल यशोदा पैलेस में काव्यायन सांस्कृतिक सामाजिक संस्था द्वारा एक्सीलेंस स्कूल के पूर्व प्राचार्य एवं कवि डॉ. एम.एस. गौर को काशी विश्वविद्यालय द्वारा डी.लिट. उपाधि प्रदान किए जाने पर उनके सम्मान में भव्य काव्य पाठ एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में सहकार भारती के पदाधिकारी एवं डॉ. यतीश जैन भी शामिल हुए। इस अवसर पर डॉ. यतीश जैन एवं भूपत सिंह मरकाम का भी सम्मान किया गया। डॉ. यतीश जैन ने सहकार भारती के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. एम.एस. गौर के सम्मान में काव्य पाठ भी किया।
कार्यक्रम का संचालन कवि नलिन निर्मल ने किया। काव्यायन सांस्कृतिक सामाजिक संस्था के संस्थापक अध्यक्ष एडवोकेट रामनरेश राजपूत ने सभी अतिथियों का सम्मान किया। वहीं सहकार भारती की मासिक बैठक के समापन अवसर पर विश्व शांति वंदना की गई।











