मेडिकल एक्सपर्ट बोर्ड के गठन पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब, मामला अभी लंबित

सागर, 12 सितंबर। आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने चिकित्सकों की गिरफ्तारी, चिकित्सकीय निर्णयों की आपराधिक जवाबदेही तथा कथित मिलावटी या स्प्यूरियस दवाओं से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में रिट याचिका क्रमांक 35051 दायर की है। याचिका पर पहली सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने की।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2005 के जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य मामले में दिए गए निर्देशों के पालन तथा चिकित्सकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई से पहले सक्षम मेडिकल विशेषज्ञों की राय लेने का मुद्दा उठाया गया है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि इस फैसले के अनुरूप अब तक प्रत्येक जिले में मेडिकल एक्सपर्ट बोर्ड का गठन क्यों नहीं किया गया।

याचिका में यह भी कहा गया है कि कथित मिलावटी, घटिया या स्प्यूरियस दवा के मामलों में केवल दवा लिखने वाले चिकित्सक की भूमिका के आधार पर आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जानी चाहिए। मामले की जांच चिकित्सक की वास्तविक भूमिका, उपलब्ध जानकारी, दवा की गुणवत्ता और लागू कानून के आधार पर की जानी चाहिए।

खंडपीठ ने मामले से जुड़े सभी आठ प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद न्यायालय मामले की आगे सुनवाई करेगा। इस मामले में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

डॉ. तल्हा साद ने बताया के याचिका का उद्देश्य वास्तविक लापरवाही या अपराध को संरक्षण देना नहीं है, बल्कि चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई में विशेषज्ञ मूल्यांकन और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करना है

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