
सैलाना नगर में डेंगू, चिकनगुनिया एवं टाईफाइट ने पसारे पेर..जनता परेशान
रतलाम जिले के सैलाना नगर में इन दिनों डेंगू के बाद अब नगर में चिकनगुनिया व टाईफाइट ने भी अपने पैर पसार लिए हैं। जनता में बीमारीयों का खोफ नजर आ रहा। साथ ही दीपावली का पर्व कहीं बिगड़ ना जाए, जनता को इस बात का डर भी सता रहा है। दिपावली पर्व पर जनता अपने – अपने घरों में साफ- सफाई वह अच्छे- अच्छे व्यंजन बनाते हैं। लेकिन बीमारी के चलते जनता को अस्पतालो के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
सैलाना नगर में डेंगू, चिकनगुनिया एवं टाईफाइट के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। आस पास क्षेत्रों से भी चिकनगुनिया के मामले की रिपोर्ट किए जा रहे हैं।आस पास क्षेत्रों और अन्य शहरों में भी मच्छरों से फैलने वाले बुखार का असर देखा जा रहा है। सैलाना में भी मच्छर जनित बीमारियों के केस बढ़ रहे हैं। जबकि दो सप्ताह से चिकनगुनिया के मामलों में भी इजाफा देखा गया है। डॉक्टर जितेन्द्र रायकवार कहते हैं कि इस बार डेंगू के साथ-साथ चिकनगुनिया के मामले भी बढ़े हैं। लोग बुखार और जोड़ों के दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल आ रहे हैं। हालांकि समय से इलाज मिलने पर बुखार ठीक भी हो रहा है। लेकिन लोगों को पूरी एहतियात बरतने की जरूरत है। साथ ही मच्छरों से बचने की जरूरत है। अपने घर के आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और मच्छर न पनपने दें। मच्छरों के काटने से होने वाला ये बुखार डेंगू जैसा ही है। इसलिए लोग इसमें और डेंगू में काफी कम भेद कर पाते हैं। लेकिन ब्लड टेस्ट की मदद से इन दोनों बुखारों का पता लगाया जा सकता है। साथ ही बारिशों के समय होने वाले किसी भी तरह के बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। क्योंकि लक्षण बढ़ने पर मरीज की जान बचाना तक मुश्किल हो जाता है।
डेंगू और चिकनगुनिया में अंतर-
चिकनगुनिया के मरीजों को जहां जोड़ों का दर्द ज्यादा होता है। वहीं डेंगू के सीरियस मामलों में रक्तस्राव और सांस लेने में परेशानी होती है। चिकनगुनिया के मरीजों के चेहरे, हथेलियों, पैरों समेत पूरे शरीर पर दाने आने शुरू हो जाते हैं। जबकि डेंगू में दानें सिर्फ चेहरे और अंगों पर ही होते हैं। डेंगू में मरीज का प्लेटलेट्स काउंट कम होने से मरीज को कमजोरी अधिक महसूस होती है। जबकि चिकनगुनिया में प्लेटलेट्स काउंट कम नहीं होता है। डेंगू का मामला गंभीर होने से व्यक्ति की जान तक भी जा सकती है। लेकिन चिकनगुनिया में इसका प्रतिशत कम होता है।
इस तरह पहचाने चिकनगुनिया के कैसे-
चिकनगुनिया भी डेंगू की तरह मच्छर के काटने से होता है। जिसमें सबसे पहले व्यक्ति को बुखार की शिकायत होती है। इसमें सबसे पहले जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द महसूस होता है। इसके अलावा सिरदर्द, थकान, शरीर पर चकत्ते, मतली और लाल आंखें जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। चिकनगुनिया के लिए आईजीएम चिकनगुनिया टेस्ट किया जाता है।
मरिज ऐसे करें बचाव-
चिकनगुनिया का बुखार भी खतरनाक साबित हो सकता है और काफी लंबे समय तक असर दिखा सकता है। इसलिए इससे बचाव के लिए अपने आस-पास पानी न इकट्ठा होने दें। मच्छर को मारने के लिए मिट्टी का तेल और दवा का इस्तेमाल करें। आस-पास साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। पूरी बांह और ढके हुए कपड़े पहनें। बच्चों को शाम को बाहर खेलने न भेजें। बाहर जाना हो तो मच्छर भगाने वाली क्रीम लगाकर ही बाहर भेजें। बुखार चढ़ने पर ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं। कोई भी लक्षण दिखने पर पूरा इलाज करवाएं, कोई लापरवाही न बरतें। शरीर में पानी की कमी न होने दें, रोजाना 2-3 लीटर पानी पीते रहें।
एक नजर मरिजो के आंकड़ो पर भी-
इन बीमारियों से बढ़ते खतरे से आम जनता मे दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। इधर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में प्रतिदिन इन्ही बीमारियों के करीब 300 से 400 मरीज रिकार्ड दर्ज हो रहे है।अस्पताल के जिम्मेदार कोई डॉक्टर इसे गंभीरता से नही ले रहे है उनका मानना है कि यह सिर्फ मौसमी बीमारी है। पिछले एक महीने में इन बीमारियों के सैकड़ों नए मामले सामने आए हैं, और हर दिन आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि अस्पतालों में जगह की कमी हो गई है, और मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। वही कुछ मरीज निजी चिकित्सालयों की मदद ले रहे है।
अस्पताल के साथ साथ निजी अस्पतालो में भी मरिजो की दिखाई दे रही भिड़-
नगर में डेंगू व चिकनगुनिया की दर इतनी तेजी से बढ़ी हुई है कि हर घर मे एक या दो मरीज आसानी से मिल रहे हैं। सरकारी अस्पतालों की सीमित सुविधाओं के चलते लोग निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन वहां भी जगह की कमी और महंगे इलाज की समस्या मरीजो के सामने मुह फाडे खड़ी हो रही है। कई मरीज तो ठीक नही होने की दशा में बार-बार अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
नगर में डेंगू और चिकनगुनिया के ही है मरिज-
नगर के निजी क्लीनिकों के चिकित्सकों के अनुसार नगर मे यह बीमारी “डेंगू और चिकनगुनिया की ही है। इससे मरीज पूरी तरह से टूट रहा है। रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। जिससे यह बीमारी दोबारा रिपीट हो रही है। स्वास्थ्य सेवाओं की चरमराई, बीमारियों को लेकर डॉक्टर मानने को तैयार नही है।
स्वास्थ्य विभाग की चरमराई व्यवस्था-
सैलाना के शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य पर प्रतिदिन बडी संख्या में मरिज अपना इलाज करवाने को आ रहे हैं। पिपलौदा, सरवन, आम्बा, शिवगढ़, बाजना, रावटी जैसे जगहों से मरिज इस केंद्र पर अपना उपचार करवाने को पहुंच रहे हैं। लेकिन दुसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 300 से 400 मरीज के रोजाना आने से यहा की व्यवस्था भी चरमरा चुकी है। मरीजो को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।











