
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए क्षेत्रीय आधार पर रीजनल इंडस्टरीज डेवलपमेंट समिट करने की प्रक्रिया शुरू की है।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव इस आयोजन में पहुंच रहे हैं और एक अच्छे कार्य के लिए उनके आगमन पर बुंदेलखंड की धरती पर उनका स्वागत है। डॉक्टर मोहन यादव ने क्षेत्रीय आधार पर औद्योगिक विकास का जो निर्णय किया है, वह इसलिए भी महत्वपूर्ण व प्रशंसनीय है, क्योंकि इसमें स्थानीय उत्पादकों को बाजार से जोड़ने का और एक बड़े बाजार सरकिल के अंग बनने का अवसर मिलेगा। डॉक्टर हरि सिंह गौर जो समूचे बुंदेलखंड के मध्य प्रदेश से लेकर उत्तर प्रदेश तक एक पितृ पुरुष जैसे हैं। जिन्होंने न केवल अपनी संपत्ति का दान कर विश्वविद्यालय की स्थापना की थी बल्कि तत्काली समाज को एक मंत्र दिया था।विकास और संपन्नता का मूल आधार शिक्षा है। उनके इस मंत्र से और विश्वविद्यालय की स्थापना से न केवल सागर बल्कि समूचा बुंदेलखंड अंचल बहुत लाभान्वित हुआ है।आज भले ही देश व विश्व के स्तर पर सागर के संपन्न लोगों को, अपने बच्चों को पढ़ाने के द्वार खुले हो परंतु इस द्वार को खोलने के लिए विश्वविद्यालय के रूप में मूल चाबी तो डॉक्टर गौर ने ही दी थी। अगर भारत सरकार ने डॉक्टर हरि सिंह गौर को भारत रत्न दिया होता तो आज हम लोग और भी गौरवान्वित होते और सामाजिक कार्यों के लिए ,शिक्षा के लिए, लोग स्वैच्छिक दान देने के लिए प्रेरित होते। मैं अभी भी उम्मीद करता हूं कि डॉक्टर मोहन यादव जो भले ही विक्रम विश्वविद्यालय के पढ़े हो, परंतु उस विश्वविद्यालय की जननीभीसागरविश्वविद्यालय ही रही है। वह अपने इस दायित्व को निभाएंगे और डॉक्टर हरि सिंह गौर को भारत रत्न देने के लिए केंद्रीय स्तर पर निरंतर पहल करते रहेंगे।मैं उनसे यह भी अपेक्षा करूंगा कि विधानसभा के आगामी सत्र में पुनः डॉक्टर हरि सिंह गौर को भारत रत्न देने का एक प्रस्ताव सर्वसम्मत पारित कराएंगे व भारत सरकार को भेजेंगे। चूंकि यह कॉन्फ्रेंस बुंदेलखंड के आंचलिक केंद्र एवं संभागीय मुख्यालय सागर में हो रही है, अतः इस अंचल के औद्योगिक विकास के लिए मेरी राय में निम्न क्षेत्र महत्वपूर्ण है-
1. बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा के लिए काफी संभावनाएं हैं और बुंदेलखंड की जमीन तथा प्राकृतिक और सार्वजनिक स्थानों को सौर ऊर्जा के उत्पादन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाया जा सकता है ।इसके लिए शासन से निम्न अपेक्षाएं हैं- 1. सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमियों को कोई प्रशासनिक बाधा ना हो, यह सुनिश्चित किया जाए तथा इसके लिए विभागीय या प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में और सचिव सौर ऊर्जा के साथ दो सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमियों तथा एक सदस्य उपभोक्ता वर्ग से लेकर यानी पांच सदस्य समिति का गठन हो, जो संभावित समस्याओं व बाधाओं का निराकरण करें।
2.सौर ऊर्जा अक्षत ऊर्जा है जो प्रदूषण खनन और किसी भी प्रकार की पर्यावरण की हानि से मुक्त है। इसलिए यह भी व्यावहारिक होगा कि सौर ऊर्जा के उपयोग करने वालों उपभोक्ताओं को न्यूनतम 5% का अनुदान ,केंद्रीय अनुदान के अलावा राज्य सरकार दे।
3. सभी सरकारी, अर्द्ध सरकारी कार्यालयों,विद्यालयों, चिकित्सालयों आदि में जितना संभव हो अधिकतम सौर ऊर्जा के यंत्र लगाए जाएं।
- बुंदेलखंड अंचल में गेहूं ,चना ,सोयाबीन, मक्का और ऐसी अन्य फसले प्रमुख रूप से पैदा हो रही है। उनके लिए स्थानीय स्तर पर सरकारी तौर से खाद्य प्रसंस्करण संयंत्र लगाने की योजना सरकार बनाएं। जिसमें सामूहिक पूंजी को प्राथमिकता मिले। 3. बुंदेलखंड के कुछ इलाकों में काफी सब्जियां पैदा होती हैं और इसीलिए आलू चिप्स,टोमेटो सॉस, पॉपकॉर्न, कॉर्न फ्लेक्स आदि के छोटे-छोटे संयंत्र तहसील व ब्लॉक स्तर पर लगाए जा सकते हैं ।यह भी सरकारी आधार पर सामूहिक पूंजी से लगाए जा सकते हैं। 4.बुंदेलखंड के जिन अंचलों में खनिज या हीरा आदि उपलब्ध है, उनसे संबंधित उद्योग भी लगाए जा सकते हैं। परंतु प्राथमिकता यह होगी कि जंगलों की कटाई ना हो, प्रकृति को नुकसान ना हो, पर्यावरण ना बिगड़े ।पर्यावरण की कीमत पर किसी भी खनिज उद्योग को लगाना मानवीय अपराध है। 5. टीकमगढ़ जिले में काफी तालाब है, वहां सिंघाड़े व मछली बहुतायत से उपलब्ध है। मत्स्य सहकारी समितियां हैं परंतु वह लगभग निष्क्रिय और कहने को मत्स्य कर्मियों की है,परंतु वास्तविकता कुछ और है। इसी प्रकार इस क्षेत्र में सिंघाड़े की खेती होती है।सरकार से यह भी अनुरोध है कि वह मत्स्य उद्योग और सिंघाड़ा उद्योग को प्राथमिकता दे तथा उन्हें आवश्यक सुविधाएं और बाजार के बड़े केंद्रों से जोड़ने की सुविधा प्रदान करें। यह उद्योग भी हजारों लोगों को आसानी से रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं। चूंकि मुख्यमंत्री का आगमन सागर हो रहा है, अतः सागर की छात्र-छात्राओं की दो विशिष्ट समस्याएं भी उनके संज्ञान में लाकर उनके निराकरण की अपेक्षा डॉक्टर मोहन यादव से है।
1.गर्ल्स डिग्री कॉलेज में लगभग 15000 के आसपास छात्राएं पढ़ाई करती हैं जिनका प्रवेश है परंतु कॉलेज में स्थान का अभाव है ।मुख्यमंत्री जी से अपील है कि इस कॉलेज को यही रखना चाहिए और इसके आसपास की रिक्त भूमि को लेकर बहुखंडी इमारत बना देना चाहिए, ताकि सब बच्चियों को बैठने की व्यवस्था हो सके। कॉलेज का यह स्थान छात्रोंओ के लिए इसलिए उपयुक्त है कि छात्राओं की सुरक्षा व यातायात की सुविधा को लेकर यह श्रेष्ठ स्थान है।
2. सागर के सरकारी कॉलेज के प्राचार्यों को डरा दबाकर उनसे छतरपुर विश्वविद्यालय से संबद्धता के लिए पत्र लिए गए थे, यह जन चर्चा है व सत्यता भी है ।सागर के कॉलेज के जो सेवानिवृत प्राचार्य हैं, अगर आप उनसे पूछेंगे तो वह आपको उस समय की भयावह कार्यवाही बता देंगे, कि किस ढंग से उनसे यह स्वीकृति ली गई। अतः अब जब मुख्यमंत्री जी ने सागर में रानी अवंतिका बाई राजकीय विश्वविद्यालय की घोषणा कर दी है तो यह उचित होगा कि सागर के सरकारी कॉलेजों को वापस सागर के राजकीय रानी अवंती बाई विश्वविद्यालय या डा हरिसिंग गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय से जुड़ने की स्वतंत्रता व अनुमति उनकी सुविधानुसार दी जाए। शुभकामनाओं के साथ, रघु ठाकुर संरक्षक, बुंदेलखंड सर्वदलीय नागरिक मोर्चा











