नारी केवल परिवार ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की भी मुख्य धुरी है : रेखा बख्शी

नारी शक्ति वंदन अधिनियम राष्ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा: डॉ. सरोज गुप्ता

नारी केवल परिवार ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की भी मुख्य धुरी है : रेखा बख्शी

विद्यार्थी सहयोग ,समानता, स्वावलंबन की दिशा में अग्रसर हों : कविता लारिया

शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में दो दिवसीय बौद्धिक विमर्श का हुआ आयोजन

सागर। नारी शक्ति वंदन अधिनियम की प्रासंगिकता को लेकर शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर की प्राचार्य प्रो सरोज गुप्ता के निर्देशन में आदिगुरु शंकराचार्य सभागार में दो दिवसीय बौद्धिक विमर्श का आयोजन किया गया। जिसमें महिला सशक्तिकरण के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आयामों पर गहन बौद्धिक विमर्श कर विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने अधिनियम की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महिलाओं की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करने वाला एक ‘शक्ति पुंज’ है।

प्रबुद्ध वक्ताओं का वैचारिक संगम

मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. रेखा बक्शी ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि नारी केवल परिवार ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की भी मुख्य धुरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अधिनियम महिलाओं को केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाने का संवैधानिक अवसर प्रदान करता है। विशिष्ट अतिथि नीलिमा पिम्पलपुरे ने सामाजिक मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता जताई, वहीं प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति चौहान ने महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण पर चर्चा करते हुए सुश्री दीपा तिवारी और शशि दीक्षित ने महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सक्रिय राजनीति को अनिवार्य बताया। श्रीमती मनीषा मिश्रा ने लैंगिक समानता और श्रीमती कविता लारिया ने विद्यार्थियों को सहयोग ,समानता, स्वावलंबन पर जोर दिया।
संगोष्ठी की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए प्राचार्य डॉ. गुप्ता ने महाविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि युवाओं, विशेषकर छात्राओं को अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग होना अनिवार्य है।
इससे पूर्व, सेमीनार के प्रथम दिवस पर प्रभारी प्राचार्य डॉ. रंजना मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन में मुख्य अतिथि श्रीमती कविता लारिया ने लगभग 150 ग्रामीण महिला कार्यकर्ताओं और छात्राओं को संबोधित करते हुए लैंगिक भेदभाव और शिक्षा की कमी जैसी चुनौतियों पर चर्चा की और छात्राओं को अधिनियम की बारीकियों से अवगत कराया गया। प्रथम दिवस के सत्र ने महिलाओं को समाज परिवर्तन के लिए सशक्त होने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र में लगभग 200 विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही, जहाँ उनकी जिज्ञासाओं का विद्वान वक्ताओं ने समाधान किया। पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिलाषा जैन द्वारा किया गया। अंत में डॉ. शुचिता अग्रवाल ने समस्त अतिथियों, प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए आभार व्यक्त किया।

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