
भाषा अध्ययनशाला व्याख्यानमाला “लिटरेरी फ्यूचर्स नाउ” (साहित्यिक भविष्य अब) का शुभारंभ
सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के अंग्रेज़ी विभाग एवं अन्य यूरोपीय भाषाओं के विभाग द्वारा स्वामीनाथन हॉल में भाषा अध्ययनशाला की व्याख्यानमाला “लिटरेरी फ्यूचर्स नाउ” (साहित्यिक भविष्य अब) का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आरंभ माँ सरस्वती तथा विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ.हरीसिंह गौर जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में माननीय कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने सभी विभागों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अंतरविषयक शोध आज के समय की अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की व्याख्यानमालाएँ विभिन्न विषयों के बीच संवाद को सुदृढ़ करती हैं और शोध को नई दिशा प्रदान करती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डीन, भाषा अध्ययनशाला एवं विभागाध्यक्ष, अंग्रेज़ी विभाग, प्रो. रश्मि सिंह ने की। यह व्याख्यानमाला प्रो. रश्मि सिंह की परिकल्पना का परिणाम है। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह श्रृंखला विभिन्न भाषाओं और विषयों के बीच संवाद को सशक्त बनाने तथा शोध के नए आयाम विकसित करने की दिशा में एक प्रयास है। कार्यक्रम में प्रो. भावतोष इन्द्र गुरु की गरिमामयी उपस्थिति विशिष्ट अतिथि के रूप में रही। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. राजेन्द्र यादव, अध्यक्ष उर्दू विभाग एवं संस्कृति विभाग, ने व्याख्यानमाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह एक सतत अकादमिक मंच है, जहाँ हिंदी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेज़ी, भाषाविज्ञान तथा अन्य विषयों के विचार एक साथ आएँगे और उनके बीच सार्थक संवाद स्थापित होगा। उन्होंने बताया कि यह पहल अंतर्विषयक अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगी तथा व्याख्यानमाला का आयोजन माह में दो बार किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री क्रिस्टोफर गुंजन कुजूर ने “इंडियन ट्राइबल लिटरेचर इन इंग्लिश” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आदिवासी जीवन-दृष्टि की प्रामाणिक अभिव्यक्ति और उसके नाम पर प्रचलित रोमानीकृत साहित्य के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए श्रोताओं के सामने विषय की नई समझ प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन सह-संयोजक डॉ. वंदना राजोरिया ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हिमांशु यादव द्वारा प्रस्तुत किया गया। भाषा अध्ययनशाला के शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र उपस्थित रहे।











