डाॅ. मुखर्जी ने सिद्ध किया व्यक्ति से बड़ा राष्ट्र और सत्ता से बड़े सिद्धांत हैं -पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक  भूपेन्द्र सिंह

डाॅ. मुखर्जी ने सिद्ध किया व्यक्ति से बड़ा राष्ट्र और सत्ता से बड़े सिद्धांत हैं -पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक  भूपेन्द्र सिंह

खुरई में पुण्य स्मरण कार्यक्रम को संबोधित किया

खुरई। श्रद्धेय डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने राजनीति को सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सर्वोच्च साधन माना। उन्होंने अपने संपूर्ण सार्वजनिक जीवन में यह सिद्ध किया कि व्यक्ति से बड़ा राष्ट्र होता है, सत्ता से बड़े सिद्धांत होते हैं और राजनीतिक सफलता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्वाभिमान होता है। यह उद्गार पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने यहां श्रद्धेय डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित पुण्य स्मरण कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

पूर्व मंत्री  सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विचारधारा और कार्यकर्ता आधारित, अनुशासित संगठन है। भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसके संस्कार, विचार, कार्यपद्धति और समर्पित कार्यकर्ता हैं। भारतीय जनसंघ की स्थापना के समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ऐसे राजनीतिक दल की कल्पना की थी, जो केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्टवाद, संगठन, संस्कार और विचारधारा पर आधारित हो। उस दौर में जब कांग्रेस का वर्चस्व था, तब डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्र को सर्वोपरि मानते हुए एक देश, एक निशान, एक प्रधान और एक विधान का संकल्प लिया। उनके द्वारा बोया गया राष्ट्रवाद का बीज आगे चलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी, कुशाभाऊ ठाकरे सहित अनेक नेताओं ने वटवृक्ष के रूप में विकसित किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से धारा-370 और 35ए को समाप्त कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को साकार किया।

पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक  भूपेन्द्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी की बनाई हुई पार्टी आज दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। यहां तक की यात्रा विचारधारा पर समझौता नहीं करने के मूलमंत्र के कारण संभव हुई है जिसके लिए डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने अपना बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि जब देश में आजादी के बाद सरकार बनी तो डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी जवाहरलाल नेहरू की सरकार में मंत्री नहीं बनना चाहते थे। उन्होंने मंत्री बनने से मना किया, तब महात्मा गाँधी जी ने डॉक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी से बात करके इसका कारण पूछा, तब उन्होंने कहा था कि ये सरकार तुष्टिकरण की नीति पर चलेगी जिससे देश का नुकसान होगा। देश के लोकतंत्र और राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए भी ये ठीक नहीं है। महात्मा गाँधी जी ने उस समय डाॅ. मुखर्जी से कहा था कि समाज के कल्याण के लिए भगवान शिव को भी विष पीना पड़ा था, इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि समाज के कल्याण के लिए आप भारत सरकार में मंत्री का पद स्वीकार करें। तब उन्होंने उद्योग मंत्री का पद स्वीकार किया। पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी  ने देखा कि नेहरू जी देश के अंदर तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं तो उन्होंने नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के बाद डाॅ. मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघसंचालक स्व.गुरु गोलवलकर जी से मिले और उनसे कहा कि कांग्रेस देश की एकता और अखंडता को खंडित करना चाहती है इसलिए देश को एक राष्ट्रवादी राजनीतिक दल की आवश्यकता है। तब  गुरु जी ने उनको एक राजनीतिक दल बनाने के लिए कहा। इसके बाद ही 1951 में जनसंघ की स्थापना हुई।
पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि 1951 से हमारी यात्रा प्रारंभ हुई। इस यात्रा को आज लगभग 75 वर्ष हो गए और आज देश में भारतीय जनता पार्टी ही ऐसी एकमात्र पार्टी है जो अपने राजनीतिक इतिहास में कभी विभाजित नहीं हुई। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भी भारतीय जनता पार्टी में कभी नेतृत्व और विचारों को लेकर विभाजन नहीं हुआ। देश की अखंडता, राष्ट्रवाद, तुष्टिकरण की राजनीति का निषेध हमारे वैचारिक मुद्दे हैं। भाजपा अपनी विचारधारा से कभी समझौता नहीं करती। विचारधारा के प्रवृत्ति अडिग रहने का यह बीज जनसंघ के अध्यक्ष के रूप में डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बोया था। डाॅ. मुखर्जी  विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिकता का समन्वय थे। पूर्व मंत्री  भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी देश की अखंडता के प्रथम वीर बलिदानी थे। वे एक देश, एक संविधान के लिए संघर्ष करने वाले नेता थे। राष्ट्रवाद, शिक्षा और लोकतंत्र में डॉ. मुखर्जी का अहम योगदान अविस्मरणीय है।

उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकात्मता और अखंड भारत के संकल्प का प्रेरक अध्याय है। भारतीय जनता पार्टी ष्राष्ट्र प्रथमष् की जिस विचारधारा को लेकर आगे बढ़ रही है, उसकी वैचारिक आधारशिला डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ही रखी थी। उन्होंने राष्ट्रहित को दलगत राजनीति से ऊपर रखा और ऐसी व्यवस्था का समर्थन किया जिसमें प्रत्येक नागरिक स्वयं को सबसे पहले भारतीय मानने का गौरव अनुभव करे। यही कारण है कि 5 अगस्त 2019 को जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और उससे जुड़े विशेष प्रावधान समाप्त किए गए, तब करोड़ों देशवासियों ने इसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अधूरे संकल्प की पूर्णता के रूप में देखा। आज पूरे देश में एक संविधान, एक तिरंगा और एक समान संवैधानिक व्यवस्था लागू है।

पूर्व मंत्री  भूपेन्द्र सिंह ने कार्यकर्ताओं को बताया कि हमारे प्रदेश अध्यक्ष श्री खण्डेलवाल ने कहा है कि भाजपा के लिए बूथ केवल मतदान केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की इकाई है। खुरई विधानसभा क्षेत्र में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की 125 वीं जयंति के अवसर पर भाजपा म.प्र. द्वारा उनके बलिदान दिवस 23 जून से 6 जुलाई तक स्मरण पखवाड़ा का अभियान चलाया गया जिसका आज जयंती पर समापन हुआ। 23 जून, बलिदान दिवस पर प्रत्येक बूथ पर श्रृद्धांजलि कार्यक्रम व मण्डल स्तर पर वृक्षारोपण हुए। 25 जून से 30 जून तक शक्तिकेन्द्र स्तर पर डाॅ. मुखर्जी के त्याग और बलिदान पर गोष्ठी के साथ आपातकाल के काले अध्याय दिवसों पर चर्चा आयोजित हुई। 28 जून को मन की बात कार्यक्रम के साथ डिजिटल प्रशिक्षण अभियान चलाया गया जिसका समापन आज रात्रि में होगा। क्षेत्र के सैकडों कार्यकर्ताओं ने पं. दीनदयाल प्रशिक्षण अभियान के तहत प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र प्राप्त किया। खुरई में तीन मंडलों के संयुक्त कार्यक्रम के साथ ही सभी मण्डलों एवं बूथों पर डा. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि कार्यकम हुए।

बैठक में वरिष्ठ भाजपा नेता हेमचंद बजाज, दिलीप सिंह गढ़ौला, हरिशंकर कुशवाहा, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष राहुल चैधरी, मंडल अध्यक्ष राजपाल सिंह राजपूत, रवींद्र सिंह राजपूत, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नन्हीं बाई अहिरवार, जनपद अध्यक्ष जमना प्रसाद अहिरवार, महिला मोर्चा अध्यक्ष रश्मि सोनी सहित भारतीय जनता पार्टी खुरई नगर, खुरई ग्रामीण व धनोरा मंडल के सभी भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, पार्षद और भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Leave a Comment

Read More