36.45 करोड़ की सौगात पर पहली बारिश का पानी! देवरी के नव-निर्मित सांदीपनि विद्यालय में जगह-जगह रिसाव

36.45 करोड़ की सौगात पर पहली बारिश का पानी! देवरी के नव-निर्मित सांदीपनि विद्यालय में जगह-जगह रिसाव
करोड़ों की लागत से बने भवन की गुणवत्ता पर उठे सवाल, कक्षाओं में टपक रहा पानी; 3 हजार विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता
संवाददाता : सतीश सेन | देवरी
देवरी (सागर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 14 जून को केसली से लोकार्पित किए गए देवरी के अत्याधुनिक शासकीय सांदीपनि उच्च माध्यमिक विद्यालय भवन की गुणवत्ता पर पहली ही बारिश में सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 36 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस भवन में जगह-जगह पानी का रिसाव होने की शिकायत सामने आई है।
स्थानीय निरीक्षण के दौरान विद्यालय भवन के कई हिस्सों में छत और अन्य स्थानों से पानी टपकता दिखाई दिया। बताया जा रहा है कि कुछ कक्षाओं में विद्यार्थियों की पढ़ाई के दौरान भी पानी रिसता नजर आया। विद्यालय में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, प्रयोगशालाओं सहित आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं, लेकिन पहली बारिश में ही भवन की छत से पानी टपकने की स्थिति ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि इस विद्यालय में करीब 3 हजार विद्यार्थियों के अध्ययन की व्यवस्था की गई है। ऐसे में भवन में पानी का रिसाव केवल निर्माण गुणवत्ता का मामला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर विषय है। लगातार पानी रिसने से विद्युत उपकरणों, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब और अन्य संसाधनों को भी नुकसान का खतरा बना हुआ है।
बिना गुणवत्ता जांच के हैंडओवर पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि मुख्यमंत्री के लोकार्पण से पहले क्या भवन का तकनीकी निरीक्षण किया गया था? क्या संबंधित इंजीनियरों, निर्माण एजेंसी, शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने भवन की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच की थी?
यदि भवन का तकनीकी निरीक्षण किया गया था, तो पहली ही बारिश में सामने आई ये खामियां जांच के दौरान क्यों नहीं पकड़ी गईं? और यदि जांच नहीं हुई, तो करोड़ों रुपये की लागत से बने भवन को बिना पर्याप्त गुणवत्ता परीक्षण के हैंडओवर किस आधार पर किया गया?
ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
भवन के निर्माण में सामने आई कथित खामियों को लेकर अब ठेकेदार, निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं, भवन को अपने अधीन लेने से पहले क्या विद्यालय स्तर पर इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच की गई थी, यह भी जांच का विषय बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित भवन में पहली बारिश में ही रिसाव होना गंभीर लापरवाही का संकेत है। यदि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी हुई है तो पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
अब देखना होगा कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस भवन में सामने आई खामियों पर प्रशासन और संबंधित विभाग क्या कार्रवाई करते हैं। फिलहाल, पहली बारिश में ही सामने आए रिसाव ने 36.45 करोड़ रुपये की निर्माण गुणवत्ता और विभागीय निरीक्षण व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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