
देवरी के सांदीपनि विद्यालय भवन में रिसाव के बाद अब भवन के परिसर में बन रही सीसी सड़क निर्माण पर उठे सवाल
36 करोड़ 45 लाख की लागत से बने भवन के आसपास परिसर में ठेकेदार दुबारा मात्र 2–3 इंच मोटी सड़क बनाने का आरोप
देवरी, सागर। देवरी स्थित शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिसका उद्घाटन केसली में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव दुबारा केसली आगमन पर किया गया था जिसके बाद ठेकेदार की लापरवाही अनियमितता पहली बरसात में पानी रिसाव को लेकर देखने मिली थी जिसमें पत्रकारो के दुबारा खवर प्रकाशन के बधाई सागर कलेक्टर का देवरी आगमन दौरान निरिक्षण भी किया गया था जिसमे सुधार कार्य करने ठेकेदार को निर्देश दिए गए थे व देवरी अनुविभागीय अधिकारी व सम्बंधित अधिकारी तथा स्कूल प्रबंधन अधिकारी को निर्देश दिया गया था की निर्माण कार्य गुणबत्ता पूर्वक कराया जाये व समय समय पर देख रेख भी की जाए मगर अभी अधिकारीयो की देख रेख के बाद भी एक बार फिर निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। लगभग 36 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से निर्मित विद्यालय भवन में हाल ही में पानी रिसाव की घटना सामने आने के बाद अब भवन के चारों ओर परिसर में बनाई जा रही सीसी सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सड़क निर्माण में ठेकेदार द्वारा निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि सड़क की मोटाई निर्धारित मापदंडों के विपरीत केवल 2 से 3 इंच रखी जा रही है, जबकि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में इससे अधिक मोटाई और मजबूत आधार आवश्यक माना जाता है।सड़क निर्माण में मात्र दो तीन इंच मोटाई रखी जा रही है ना ही हाड कोड डाला गया न ही बाइब्रेटर चलाया जा रहा है लोकल छोटी गिट्टी का उपयोग किया जा रहा है जिसमे
गुणवत्ता पर फिर उठी उंगली
विद्यालय भवन में पानी रिसाव की घटना के बाद संबंधित निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पहले ही सवालों के घेरे में थी। अब सड़क निर्माण में कथित लापरवाही सामने आने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने शैक्षणिक परिसर में घटिया निर्माण कार्य भविष्य में बड़ी समस्या बन सकते हैं।
स्थानीय नागरिकों ने की जांच की मांग
क्षेत्र के नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण स्थल पर तकनीकी टीम भेजकर सड़क की मोटाई, गुणवत्ता और उपयोग की जा रही सामग्री की जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो सड़क जल्दी टूट सकती है और सरकारी धन की हानि होगी।
जिम्मेदार अधिकारियों से कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है
नागरिकों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
पारदर्शिता पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े बजट वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी निगरानी अत्यंत आवश्यक है। विद्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में बार-बार निर्माण संबंधी शिकायतें सामने आना सरकारी कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को क्या कदम उठाता है
इनका कहना है :-
स्कूल भवन निर्माण में टेंडर में ही तीन वर्ष तक का नियम है यदि भवन जर्जर या सड़क जर्जर होती है तो ठेकेदार को पुनः निर्माण कराना पड़ता है इसलिए आप मेरा तो यही लिख दो निर्माण सही हो रहा है
मुनव्वर खान अनुविभागीय अधिकारी देवरी











