जेन-जी देश की सबसे बड़ी शक्ति, तकनीक को ताकत बनाकर आगे बढ़ें युवा – अविराज सिंह

जेन-जी देश की सबसे बड़ी शक्ति, तकनीक को ताकत बनाकर आगे बढ़ें युवा – अविराज सिंह

खुरई। मध्यप्रदेश शासन द्वारा छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित निःशुल्क साइकिल वितरण कार्यक्रम में शासकीय हाई स्कूल ललोई में सहभागिता करते हुए युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि जेन-जी देश की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है और युवाओं को अपनी क्षमता पहचानकर देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तकनीक और इंटरनेट के दौर में आगे बढ़ रही है, इसलिए अपने हुनर, मेहनत और नई तकनीक का सही उपयोग करते हुए युवा अपने भविष्य के साथ देश का भविष्य भी बदल सकते हैं। इस अवसर पर उन्होंने ‘सम्मान, जो समाज के काम आए’ पहल के तहत छात्र-छात्राओं को पुस्तकें, कापी, पेन के साथ ही छाते भेंट किये

अविराज सिंह ने कहा कि जेन-जी अर्थात वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी देश की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है, क्योंकि यह पीढ़ी तकनीक, इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों के साथ बड़ी हुई है। आज के युवा केवल दर्शक बनकर नहीं, बल्कि देश के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनकर अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं के कंधों पर ही युग की कहानी आगे बढ़ती है और इतिहास भी उसी दिशा में मुड़ता है, जिस ओर जवानी चलती है। इसलिए अपने हुनर पर भरोसा, अपनी मिट्टी पर गर्व और अपनी मेहनत पर विश्वास रखते हुए युवाओं को अपने भविष्य के साथ-साथ देश के भविष्य को भी नई दिशा देने का संकल्प लेना चाहिए।

अविराज सिंह ने कहा कि जेन-जी केवल एक नई पीढ़ी का नाम नहीं है, बल्कि तेजी से बदलती दुनिया और नई संभावनाओं का प्रतीक है। यह ऐसी पीढ़ी है जिसने इंटरनेट, मोबाइल, सामाजिक माध्यम और आधुनिक तकनीक को अपने जीवन का हिस्सा बनते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि आज बच्चों और युवाओं के सामने पुरानी पीढ़ियों की तुलना में चुनौतियां भी अलग हैं और अवसर भी अलग हैं। ऐसे समय में युवाओं पर अपनी बात थोपने के बजाय उनके साथ संवाद करना, उन्हें समझना और विश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षक युवाओं को केवल यह बताने के बजाय कि क्या करना है, उन्हें यह समझाने का प्रयास करें कि किसी निर्णय के पीछे सोच क्या होनी चाहिए। संवाद और संस्कार के साथ मिलने वाला मार्गदर्शन ही युवाओं को सही दिशा दे सकता है।

उन्होंने कहा कि आने वाला समय तकनीक का है और युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, डेटा, रोबोटिक्स, स्टार्टअप और कृषि नवाचार जैसी नई विधाओं को बाधा नहीं, बल्कि अपनी ताकत और सबसे बड़े औजार के रूप में देखना चाहिए। खुरई में कृषि महाविद्यालय के भवन एवं छात्रावास निर्माण के लिए 131 करोड़ रुपए की लागत से कार्य आगे बढ़ रहा है तथा 75 एकड़ भूमि में अनुसंधान केन्द्र विकसित किया जा रहा है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित परियोजना भी लाई जा रही है। इससे क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक और उन्नत खेती के लिए प्रशिक्षण के नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि मालथौन और बांदरी में 1268 लाख रुपए की लागत से दो नवीन महाविद्यालयों का निर्माण कराया गया है तथा खुरई नगर में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति भी मिली है। ये प्रयास क्षेत्र के युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

अविराज सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुविधा है, विकल्प नहीं। यह हमारे कार्य को आसान बना सकती है, लेकिन हमारी सोच, विवेक, रचनात्मकता और मौलिकता का स्थान नहीं ले सकती। विद्यार्थियों को इसका उपयोग आसान और नियमित कार्यों में सहायता के लिए करना चाहिए, लेकिन हर उत्तर के लिए तकनीक पर निर्भर नहीं होना चाहिए। यदि विद्यार्थी स्वयं सोचने, प्रश्न पूछने और समस्याओं का समाधान खोजने की आदत छोड़ देंगे तो उनकी मौलिक सोच कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से नकली तस्वीरें, वीडियो और आवाजें तैयार करना भी आसान हुआ है, इसलिए सामाजिक माध्यमों पर मिलने वाली प्रत्येक सामग्री पर आंख मूंदकर विश्वास करने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करना भी युवाओं की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सफलता के लिए समय का सम्मान और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। जो काम आज किया जा सकता है, उसे कल पर टालना असफलता की शुरुआत हो सकती है। युवाओं को अपनी दिनचर्या व्यवस्थित करते हुए पढ़ाई, खेल, परिवार, समाज और रचनात्मक कार्यों के लिए समय निर्धारित करना चाहिए। प्रतिदिन अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करने की आदत विकसित करनी चाहिए, क्योंकि पढ़ने वाला व्यक्ति केवल जानकारी हासिल नहीं करता, बल्कि अपनी सोच का विस्तार भी करता है। उन्होंने कहा कि जीवन में असफलता आने पर निराश होने की आवश्यकता नहीं है। कई बार असफलता हमें उस दिशा की ओर ले जाती है, जहां हमारी वास्तविक क्षमता और उद्देश्य छिपा होता है। इसलिए असफलता को अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का अवसर मानना चाहिए।

अविराज सिंह ने कहा कि आज युवाओं को अपनी ऊर्जा सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगानी होगी। खेल, योग, ध्यान और सांस्कृतिक गतिविधियां युवाओं को अनुशासित, स्वस्थ और आत्मविश्वासी बनाती हैं। खाली समय का सदुपयोग नहीं किया गया तो गलत आदतें युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि फिल्मों, वेब सीरीज और सामाजिक माध्यमों पर कई बार नशे को आधुनिकता या आकर्षण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जबकि वास्तविक जीवन में नशा व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों को नुकसान पहुंचाता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और समाज में नशा विरोधी जागरूकता अभियान लगातार चलाए जाने चाहिए। नशामुक्त, शिक्षित और संस्कारी युवा ही विकसित भारत की मजबूत पहचान बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। लक्ष्य स्पष्ट होगा तो समय और ऊर्जा का उपयोग भी सही दिशा में होगा। स्वामी विवेकानंद का संदेश था कि एक विचार को अपना जीवन बना लो और उसी लक्ष्य की दिशा में निरंतर आगे बढ़ो। उन्होंने कहा कि इतिहास में अनेक उदाहरण हैं, जब युवाओं ने कम उम्र में ही असाधारण कार्य कर अपनी क्षमता साबित की। आज भी हमारे सामने ऐसे युवा हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद खेल, शिक्षा, विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। इसलिए किसी युवा को अपनी परिस्थितियों को अपनी सीमा नहीं मानना चाहिए। मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की इच्छा के साथ आगे बढ़ने वाला युवा अपनी मंजिल स्वयं तय कर सकता है।

अविराज सिंह ने कहा कि युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ संस्कार, कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी है। इसी सोच के साथ समाजहित में चलाए जा रहे सेवा कार्यों में जरूरतमंदों तक उपयोगी सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। ‘सम्मान, जो समाज के काम आए’ जैसी पहल का उद्देश्य भी यही है कि सम्मान के रूप में मिलने वाली सामग्री को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखकर उसका उपयोग स्कूली बच्चों और जरूरतमंद परिवारों के हित में किया जाए। उन्होंने कहा कि भूपेन्द्र भैया रक्त हेल्पलाइन सेवा के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को रक्त उपलब्ध कराने का कार्य भी लगातार किया जा रहा है, जिससे अनेक परिवारों को कठिन समय में सहायता मिली है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे स्वयं भी समाजसेवा से जुड़ें और अपने आसपास किसी जरूरतमंद की मदद करने को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तब और मजबूत होता है, जब युवा केवल राजनीति और समाज को देखने वाले दर्शक न रहें, बल्कि अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सक्रिय भागीदारी करें। युवाओं को केवल राजनीति पर चर्चा या आलोचना करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने क्षेत्र, समाज और देश के विकास में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज लिए गए निर्णय ही आने वाले भारत का स्वरूप तय करेंगे। इसलिए युवाओं को अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे शिक्षा के साथ अपने व्यक्तित्व, भाषा, कौशल और व्यवहार पर भी काम करें तथा अपनी प्रतिभा को लगातार निखारते रहें। अपनी सोच को बड़ा रखकर, मेहनत को अपना आधार बनाकर और संस्कारों को अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ने वाला युवा ही देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

कार्यक्रम में प्राचार्य अरविंद मिश्रा, मंडल अध्यक्ष नीतेश यादव, महामंत्री निरंजन ठाकुर, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि चुन्नीलाल कुशवाहा, अनुसूचित जाति मोर्चा मंडल अध्यक्ष शिवलाल अहिरवार सहित तोरण सिंह, दयाराम चैरसिया, राजकुमार अहिरवार सरपंच गढ़ौली, अभय सिंह ठाकुर, उदय राज ठाकुर, छोटू दुबे, रविन्द्र ठाकुर, सौरभ साहू, गोविंद विश्वकर्मा, नीलेश बघेल, रहीश राम ठाकुर, प्रदीप यादव सकरपुरा, दिनेश ठाकुर, राजेश्वरी ठाकुर, बादल पटेल, शिवराज सिंह दादा, देवेन्द्र पटेल, छोटे राजा, रामशरण ठाकुर, सुखदेव सिंह, अनिकेत, कल्याण सिंह, आनंद सिंह, गजू अहिरवार, बलराम साहू, मूरत सेन, मनीराम ठाकुर चैका, रामअवतार सिंह पूर्व सरपंच, बकील लोधी, रामरतन यादव, घूमन, रामबाबू अहिरवार, गब्बर, पप्पू यादव बनखिरिया, राधे महाराज और शिवम ठाकुर धनौरा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता, विद्यार्थी एवं नागरिक उपस्थित रहे।

उक्त कार्यक्रम के उपरांत अविराज सिंह ने ऑफीसर्स कॉलोनी खुरई स्थित विधायक कार्यालय में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में आमजन और कार्यकर्ताओं से चर्चा की और उनकी समस्याएं सुनी।

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