देवरी क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टरों का जाल! बिना पंजीयन इलाज की शिकायतों से ग्रामीणों की चिंता बढ़ी

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गौरझामर, कोपरा, सिंगपुर गंजन, अनंतपुरा और महाराजपुर में निजी उपचार केंद्रों की जांच की मांग, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

देवरी। देवरी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में कथित रूप से बिना आवश्यक पंजीयन और निर्धारित चिकित्सा मानकों के उपचार केंद्र संचालित होने की शिकायतें सामने आई हैं। गौरझामर, कोपरा, सिंगपुर गंजन, अनंतपुरा और महाराजपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में निजी क्लीनिकों और अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग से इन केंद्रों की निष्पक्ष जांच कराकर मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

इंजेक्शन और दवाओं से उपचार, गंभीर बीमारियां ठीक करने के दावों की शिकायत

स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, कुछ उपचार केंद्रों पर मरीजों को इंजेक्शन और टैबलेट देकर इलाज किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर गंभीर बीमारियों का उपचार करने के दावे किए जाने की शिकायतें भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवार स्थानीय उपचार केंद्रों पर निर्भर रहते हैं।

ऐसे में यदि किसी केंद्र पर बिना वैध योग्यता या आवश्यक अनुमति के उपचार किया जा रहा है, तो मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित केंद्रों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।

गौरझामर में डॉ. टी.के. विश्वास, रजूमदार और दिलीप राय सहित कुछ नाम स्थानीय स्तर पर सामने आने की बात कही गई है। कोपरा, सिंगपुर गंजन और अनंतपुरा में भी कथित रूप से नियमों के विपरीत उपचार केंद्र संचालित होने की शिकायतें हैं। इन व्यक्तियों या केंद्रों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि किसी आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

बीएमएस डिग्रीधारियों के चिकित्सा अभ्यास पर भी जांच की जरूरत

शिकायतों में कुछ बीएमएस डिग्रीधारी चिकित्सकों के चिकित्सा अभ्यास और उपचार केंद्रों के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर चिकित्सकों की योग्यता, पंजीयन और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं की जाती।

नियमानुसार, चिकित्सा अभ्यास करने वाले व्यक्ति की मान्य योग्यता, संबंधित चिकित्सा परिषद में पंजीयन और उपचार का दायरा लागू कानूनों के अनुरूप होना आवश्यक है। इसी तरह, चिकित्सा संस्थानों को उन पर लागू पंजीयन, स्वच्छता, जैव-चिकित्सकीय अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है।

इसलिए आवश्यक है कि स्वास्थ्य विभाग संबंधित केंद्रों के दस्तावेजों और वहां उपलब्ध सुविधाओं की जांच करे तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करे।

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

क्षेत्र में मिल रही शिकायतों के बीच देवरी की ब्लॉक स्वास्थ्य अधिकारी पूजा परमार की निगरानी और विभागीय कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कथित अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

हालांकि, इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष और अब तक की गई जांच या कार्रवाई का विवरण उपलब्ध होना जरूरी है। विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि संबंधित शिकायतों पर क्या कदम उठाए गए हैं।

गरीब मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि

ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर मरीज अक्सर कम खर्च में इलाज की उम्मीद लेकर स्थानीय क्लीनिकों तक पहुंचते हैं। यदि किसी अपात्र व्यक्ति द्वारा गंभीर बीमारियों का उपचार किया जाता है या बिना उचित चिकित्सकीय आकलन के इंजेक्शन और दवाएं दी जाती हैं, तो मरीजों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

इसलिए गौरझामर, कोपरा, सिंगपुर गंजन, अनंतपुरा और महाराजपुर में संचालित निजी क्लीनिकों एवं उपचार केंद्रों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जांच में अनियमितताएं मिलने पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध लागू कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में योग्य चिकित्सकों और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत है।

अब सवाल यह है कि इन शिकायतों की जांच कब होगी? क्या स्वास्थ्य विभाग संबंधित उपचार केंद्रों के पंजीयन, चिकित्सकों की योग्यता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मानकों की जांच कराएगा? ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभाग शिकायतों को गंभीरता से लेकर तथ्यात्मक जांच करेगा और आवश्यक कदम उठाएगा।

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