महिला किसान दिवस पर कौशल विकास प्रशिक्षण संपन्न, 140 महिला किसानों ने लिया भाग

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उन्नत कृषि पद्धतियों, आधुनिक तकनीकों और प्राकृतिक खेती की दी गई जानकारी, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

सागर, 18 अक्टूबर 2026। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला सागर के अंतर्गत आत्मा परियोजना के तत्वावधान में विकासखंड बंडा के ग्राम सेमरादांत में अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के उपलक्ष्य में महिला किसान दिवस पर कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 140 महिला कृषकों एवं ग्रामीणजनों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। विशिष्ट अतिथि शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि देश और प्रदेश के विकास में महिला किसानों का योगदान अतुलनीय है। सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने महिला किसानों के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

किसान मोर्चा के जिला मंत्री रजनीश सैनी एवं जिला कार्यालय मंत्री रजनीश यादव ने महिला किसानों को शासन की विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया।

आधुनिक कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती की दी जानकारी

मुख्य प्रशिक्षक कृषि विज्ञान केंद्र देवरी, सागर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आशीष त्रिपाठी ने महिला किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों, आधुनिक तकनीकों, जैविक खेती तथा कौशल विकास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने कहा कि महिलाएं कृषि गतिविधियों को व्यावसायिक स्तर पर आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। इसके लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने और कृषि आधारित आजीविका के अवसरों का लाभ लेने की आवश्यकता है।

विकासखंड तकनीकी प्रबंधक शैलेष पाण्डेय ने समूह निर्माण एवं प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं मानव विकास सेवा संघ के परियोजना समन्वयक चंद्र किशोर नरवर ने महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी देते हुए महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनने के लिए प्रेरित किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में फील्ड असिस्टेंट दिनेश नामदेव एवं एनिमेटर वीरेन रजक ने सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में निधि पाण्डेय ने अतिथियों एवं प्रशिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना, उनके कौशल का विकास करना तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती के माध्यम से उनकी आय और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना रहा।

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