मालथौन से सागर तक विभिन्न धार्मिक आयोजनों में शामिल हुए युवा नेता, महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का किया कंठस्थ पाठ
मालथौन/सागर। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि मां भगवती की आराधना भारतीय संस्कृति की आत्मा है। मां दुर्गा की उपासना के बिना भारतीय संस्कृति की कल्पना नहीं की जा सकती। नवरात्र का पर्व हमारी आस्था, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है, जो समाज को साहस, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
17 अक्टूबर को अविराज सिंह ने मालथौन सहित सागर में आयोजित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता कर मां दुर्गा के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न स्थानों पर आयोजित आरती में भाग लिया तथा मां महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का कंठस्थ पाठ कर शक्ति उपासना के महत्व पर प्रकाश डाला।
महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र में मां भगवती के शौर्य और सामर्थ्य का वर्णन
मालथौन के अटल मार्केट में आयोजित दो दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा एवं 11 फुट ऊंची मां महाकाली की प्रतिमा स्थापना कार्यक्रम में अविराज सिंह ने व्यासपीठ पर विराजित वृंदावन धाम की पूज्य देवी शिवी दीक्षित के श्रीचरणों में प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होंने मां महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का कंठस्थ वाचन किया।
अविराज सिंह ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रचित महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र मां दुर्गा की आराधना का महत्वपूर्ण स्तोत्र है। इसमें मां भगवती के शौर्य, सामर्थ्य, करुणा और दुष्ट शक्तियों के विनाशकारी स्वरूप का वर्णन मिलता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका पाठ करने से भक्तों में आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का संबल मिलता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय धार्मिक परंपराओं में शक्ति उपासना को विशेष महत्व दिया गया है। महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि युद्ध के लिए प्रस्थान करने से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को मां की आराधना और स्तुति करने का संदेश दिया था। भारतीय संस्कृति में मां शक्ति को विजय, साहस और संकटों से मुक्ति का आधार माना गया है।
मां कालरात्रि की आराधना से मिलता है भय और संकटों से मुक्ति का संदेश
अविराज सिंह ने कहा कि नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। मां कालरात्रि को भक्तों की रक्षक और दुष्ट शक्तियों का विनाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। उनकी आराधना हमें निर्भय होकर जीवन की चुनौतियों का सामना करने तथा धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। मंदिरों में पूजा-अर्चना, आरती, झांकियों के दर्शन और भोग अर्पण जैसे आयोजनों से समाज में श्रद्धा, एकता और सांस्कृतिक चेतना मजबूत होती है।
मालथौन से सागर तक धार्मिक आयोजनों में की सहभागिता
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अविराज सिंह ने सबसे पहले दोपहर 3 बजे अटल मार्केट, मालथौन में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा एवं मां महाकाली स्थापना कार्यक्रम में सहभागिता की और महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का कंठस्थ पाठ किया।
इसके बाद शाम 7 बजे सागर के शनिचरी वार्ड में श्री देव सिंहवाहिनी समिति द्वारा आयोजित मां दुर्गा की आरती में शामिल हुए और स्तोत्र का पाठ किया। रात 8 बजे श्री कच्छ कड़वा पाटीदार समाज, सागर द्वारा आयोजित नवरात्रि गरबा महोत्सव में पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन एवं आरती की। इसके बाद रात 9 बजे भोपाल रोड स्थित सरस्वती मैरिज गार्डन में आयोजित सांस्कृतिक गरबा महोत्सव में सहभागिता कर मां भगवती की आराधना की और महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का कंठस्थ वाचन किया।
इन धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में श्रद्धालुओं के बीच भक्ति और उत्साह का वातावरण देखने को मिला। बड़ोदियाकलां, मालथौन और बांदरी में आयोजित कार्यक्रमों में भी उनकी सहभागिता रही।
सांस्कृतिक एकता और सनातन परंपराओं को मजबूत करने का संदेश
अविराज सिंह ने कहा कि धार्मिक आयोजन समाज में आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नवरात्र का पर्व हमें अपनी परंपराओं से जुड़ने, मातृशक्ति का सम्मान करने और समाज में सकारात्मकता का संदेश फैलाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने विभिन्न आयोजनों में उपस्थित वरिष्ठजनों, मातृशक्ति, युवाओं और श्रद्धालुओं का अभिवादन करते हुए सभी को शारदीय नवरात्र की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मां भगवती से सभी के सुख, समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की।







