सुरक्षित बचपन अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ, सागर में आयोजित हुई ‘उड़ान’ कार्यशाला

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बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और सर्वांगीण विकास पर दिया जोर, 60 विद्यार्थियों ने लिया भाग; उत्कृष्ट जिज्ञासा दिखाने वाले 10 विद्यार्थी हुए पुरस्कृत

सागर। बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने तथा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से 1 नवंबर 2026 को ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का राज्य स्तरीय शुभारंभ एवं एक दिवसीय ‘उड़ान’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक, जिला अनूपपुर में आयोजित हुआ, जिसका सीधा प्रसारण यूट्यूब के माध्यम से किया गया।

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधिपति एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष विवेक रूसिया, न्यायमूर्ति दीपक खोत, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव सहित अन्य न्यायाधीशगण उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सागर स्थित एडीआर भवन के सभाकक्ष में भी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा गया। यहां प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एम.के. शर्मा, जिला न्यायाधीश सुधांशु सक्सेना, प्राधिकरण के सचिव एवं जिला न्यायाधीश संतोष सैनी, जिला न्यायाधीश नेहा श्रीवास्तव, न्यायालय के रजिस्ट्रार प्रीतम बंसल, जिला विधिक सहायता अधिकारी दिव्या भलावी सहित लगभग 60 छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

मोबाइल का सदुपयोग करें विद्यार्थी, गुड टच-बैड टच की जानकारी भी दी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला न्यायाधीश एम.के. शर्मा ने विद्यार्थियों को मोबाइल के दुरुपयोग से बचने और इसका उपयोग शिक्षा एवं ज्ञानवर्धन के लिए करने की सलाह दी। उन्होंने बच्चों को गुड टच-बैड टच के बारे में जागरूक करते हुए बताया कि किसी भी प्रकार की परेशानी या बाल अधिकारों से संबंधित शिकायत के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क किया जा सकता है।

स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और बाल अधिकारों पर विशेषज्ञों ने किया जागरूक

कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन डॉ. स्मिता दुबे ने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, आधुनिक उपकरणों के सीमित उपयोग, बीमारियों से बचाव, लैंगिक हिंसा और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रीतम बंसल ने विद्यार्थियों को बेहतर जीवनशैली अपनाने, रोजगार के विभिन्न विकल्पों, कौशल विकास, लक्ष्य निर्धारण और छात्रवृत्ति के अवसरों के बारे में बताया।

विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम नेहा श्रीवास्तव ने बाल संरक्षण व्यवस्था, पॉक्सो अधिनियम 2012 के प्रमुख प्रावधानों, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, बाल सुरक्षा उपायों तथा राज्य एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने निःशुल्क कानूनी सहायता की उपलब्धता के संबंध में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी।

वहीं साइबर फॉरेंसिक यूनिट जोन सागर के कार्यवाहक प्रधान आरक्षक अम्बर तिवारी ने सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, साइबर बुलिंग, इससे जुड़े जोखिमों और कानूनी उपायों के बारे में विस्तार से समझाया।

बच्चों की सुरक्षा और विकास सामूहिक जिम्मेदारी : संतोष सैनी

कार्यक्रम के समापन पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संतोष सैनी ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। उनकी सुरक्षा, शिक्षा और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक बालिका को भयमुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने, सम्मानपूर्वक जीवन जीने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का पूरा अधिकार है।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने न्याय एवं कानून से जुड़े विषयों पर उत्साहपूर्वक सवाल पूछे। उत्कृष्ट जिज्ञासा और सहभागिता प्रदर्शित करने वाले 10 विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया गया।

‘उड़ान’ कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया, बल्कि उन्हें स्वस्थ जीवनशैली, साइबर सुरक्षा, कानूनी संरक्षण और बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

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