
एशियाई खेलों में 10,000 मीटर दौड़ में 16 साल बाद भारत को मिला पदक, सीमा ने जीता कांस्य
हिमाचल प्रदेश की धाविका सीमा कुमारी ने शानदार जज्बे और संघर्ष का परिचय देते हुए एशियाई खेलों में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में ऐतिहासिक कांस्य पदक अपने नाम किया। दौड़ के दौरान उनके जूते का सोल निकल गया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आखिरी तक अपनी रफ्तार बनाए रखते हुए भारत के लिए पदक सुनिश्चित किया।
सीमा ने 32 मिनट 50.05 सेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में भारत को एशियाई खेलों में 16 साल बाद पदक मिला है।
दौड़ की शुरुआत में सीमा ने शानदार प्रदर्शन किया। शुरुआती करीब 2,000 मीटर तक वह अग्रणी धाविकाओं में बनी रहीं। इसी दौरान उनके जूते का सोल निकलने लगा, जिससे उनकी रफ्तार प्रभावित हुई और वह पीछे खिसक गईं। इसके बावजूद सीमा ने दौड़ छोड़ने के बजाय संघर्ष जारी रखा।
दौड़ में जब करीब 2,000 मीटर का सफर बाकी था, तब सीमा पांच धाविकाओं के समूह में पांचवें स्थान पर थीं। ऐसे समय में पदक की उम्मीद मुश्किल जरूर थी, लेकिन सीमा ने अंतिम चरण में जबरदस्त वापसी की।
अंतिम 1,000 मीटर में सीमा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने एक-एक कर प्रतिद्वंद्वी धाविकाओं को पीछे छोड़ा और तीसरे स्थान पर पहुंच गईं। आखिरी कुछ मीटर में उन्होंने पीछे से आ रही धाविकाओं को खुद से आगे नहीं निकलने दिया और कांस्य पदक पर कब्जा जमा लिया।
10,000 मीटर में भारत की तीसरी महिला पदक विजेता
सीमा कुमारी की यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि एशियाई खेलों की महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाली वह भारत की केवल तीसरी महिला एथलीट बनी हैं।
इससे पहले 2010 के एशियाई खेलों में प्रीजा श्रीधरन ने स्वर्ण पदक और कविता राउत ने रजत पदक जीता था। अब सीमा कुमारी ने कांस्य पदक जीतकर इस सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
सीमा की यह दौड़ केवल पदक जीतने की कहानी नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में हार न मानने और आखिरी क्षण तक संघर्ष करते रहने की मिसाल बन गई है। जूते का सोल निकलने के बावजूद उन्होंने दौड़ पूरी की और भारत के लिए ऐतिहासिक पदक हासिल किया।







