संसद के नए भवन में संसद के पिछले हमले की 22वीं बरसी के दिन दर्शक दीर्घा से दो लोग संसद में कूदे और उन्होंने पीले रंग का धुआं भी छोडा ।इस घटना की चेतावनी सरकार के पास पहले से भी थी की कनाडा के आतंकवादी संगठन के मुखिया जिन्होंने चेतावनी सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि वह इस संसद की 22वीं वर्षी के दिन कुछ आश्चर्य जनक करेंगे। इसके बाद भी सरकार ने चेतावनी पर समुचित ध्यान नहीं दिया और आवश्यक कदम नहीं उठाए।
यह प्रसन्नता की बात है की कोई गंभीर घटना नहीं हुई और जो लोग कूदे हैं उनका उद्देश्य कोई हिंसा करना नहीं बल्कि संसद का ध्यान कुछ मुद्दों पर आकर्षित करना लगता है ।उनके तरीके से असहमति हो सकती है परंतु उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए अहिंसक तरीके को ही इस्तेमाल किया है ।मैं नहीं जानता हूं कि संसद के अध्यक्ष महोदय इसे किस रूप में लेंगे परंतु अगर वह मेरी सलाह माने तो उन्हें इन लोगों को स्वत :अपनी ओर से माफ कर देना चाहिए और सरकार को सलाह देना चाहिए कि उनकी जो समस्या है वह एक अर्थ में देश की भी पीड़ा है उसे सुने।
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले बार जब 22 साल पहले संसद पर हमला हुआ था तो वह आतंकवादीहमला पाकिस्तान प्रायोजित था और उनका उद्देश्य हिंसा करना था ।
परंतु भले ही इस बार उद्देश्य वह ना रहा हो और आतंकवादी ना रहे हो केवल दुससाहसी सोच के लोग रहे हो परंतु अगर दूर ताक कुछ भी संभव हो सकता था। पिछले बार सांसदों ने बहुत कमजोरी दिखाई थी और दरअसल सांसद और मंत्रीयों ने सेंट्रल हाल में घुस कर अपने आप को बंद कर लिया था तथा कई सुरक्षा प्रहरी आतंकवादियों से लड़ते हुए मारे गए थे ।अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे ।परंतु जो गंभीर रूप से घायल हुए उनकी सुधि बाद में किसी सरकार ने नहीं ली ।यह भी सरकारों की एक गंभीर भूल है । और अब सुरक्षा प्रहरी भी सोचने लगे हैं कि हम हे क्यों जान खतरे में डालें। हालाकि इस बार सांसदों ने बहादुरी दिखाई है और अपराधियों को स्वत: पकड़ कर सुरक्षा प्रहरीयों को सौंपा। वे इसके लिए अभिनंदन और साधुवाद के पात्र हैं।
तीसरी महत्वपूर्ण बात जो मैं कहना चाहता हूं की जिन सांसद महोदय ने इन लोगों को दर्शक दीर्घा के पास दिलाए हैं वह भी एक प्रकार से कदाचरण के अपराधी हैं ।आखिरी संसद का यह दायित्व होता है कि वह पास जारी करने के पहले लोगों को पहचानता हो या उनका पता कर दे।ऐसे व्यक्तियों को पास सांसद ने कैसे दिए ?और वह भी भाजपा के सांसद ने ?कल्पना करें कि अगर वह सांसद किसी बीजेपी विरोधी पार्टी के होते तो आज भाजपा उसे किस रूप में प्रचा रित कर रही होती ।अगर भाजपा में और स्पीकर महोदय में ईमानदारी की भावना है तो उन्हें इन सांसद महोदय के खिलाफ भी उसी प्रकार कदाचरण के लिए कार्रवाई करना चाहिए जिस प्रकार उन्होंने महुआ मोईत्र की कदा चरण के लिए संसद सदस्यता समाप्त की है।
क्या बीजेपी का सांसद होना इस बात का लाइसेंस है कि वह किसी भी अपराधी लोगों को या किसी भी कारण से किसी को बगैर किसी जिम्मेदारी के पास जारी करा दें और किसी भी गंभीर घटना को अवसर दिला दें। या देश के प्रधान मंत्री और ग्रह मंत्री जी की जान को खतरा पैदा कर दें।
इन संसद सदस्य महोदय का अपराध भी गंभीर है और अगर संसद इस पर निष्पक्ष राय नहीं बनायेगी तो यह भी संसदीय इतिहास में एक अपराध के रूप में जाना जाएगा ।
प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी से में पूछना चाहता हूं कि आप कश्मीर में तो सुरक्षा कर सकते हैं परंतु अपनी संसद में अपने घर में ही अपनी सुरक्षा नहीं कर सकते। आप की काबिलियत पर भी यह एक प्रश्न चिन्ह है और भले ही आप इसे टालने का प्रयास करें परंतु देश और समाज का एक हिस्सा आपकी इस अकर्मणयता और असफलता पर चिंतित है। अगर मान लीजिए यह कोई प्रतिबद्ध आतंकवादी होते और हथियार लेकर गए होते या कोई ऐसी चीज जो जहरीले पाउडर वाली हो लेकर गए होते तो देश की संसद का क्या हाल होता ?क्या यह सामान्य घटना है और क्या इस घटना के लिए देश के गृहमंत्री को जिम्मेदारी नहीं लेना चाहिए ।
वैसे तो हिंदुस्तान की संसद को ही यह महसूस करना चाहिए की अब देश में यह भावना बन रही है की संसद में आम आदमी या जनता की बात नहीं होती और ना सुनी जाती है और इसीलिए कुछ गुमराह या विचारधारा से भटके या भटकाए गए नौजवानों ने यह रास्ता अपनाया।
मैं इस रास्ते को उचित नहीं मानता हूं। मैं चाहता हूं कि देश में लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव हो और देश की व्यवस्था बदले।
पर देश के सत्ताधीशों से मैं कहना चाहता हूं कि आप जान लीजिए की सुरक्षा किसी मूर्ति पूजा या मंत्र जाप से नहीं होती है बल्कि कौशल सजगता चातुर्य और प्रशासन की क्षमता से होती है ।











