
- पुलिस कंट्रोल रूम सागर
- दिनांक 21/04/26
सागर पुलिस की संवेदनशीलता: ऑटो में छूटी 3 लाख की PFT मशीन 6 घंटे में बरामद, रोते हुए आए युवक के चेहरे पर लौटाई मुस्कान
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में सीसीटीवी पुलिस कंट्रोल रूम की टीम ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ढूँढ निकाला ऑटो
सागर | दिनांक: 21 अप्रैल 2026
सागर पुलिस ने एक बार फिर ‘देशभक्ति-जनसेवा‘ के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए एक गरीब युवक के रोजगार के साधन को चंद घंटों में सुरक्षित वापस लौटाया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) लोकेश कुमार सिन्हा के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन में कंट्रोल रूम की टीम ने तत्परता दिखाते हुए ऑटो में छूटी करीब 3 लाख रुपये की मशीन बरामद कर उसे उसके असली मालिक तक पहुँचाया।
घटना का विवरण: जब फफक-फफक कर रो पड़ा युवक
आज सुबह लगभग 11:00 बजे पंकज दुबे, जो सिप्ला कंपनी में ‘ब्रीथ फ्री एजुकेटर’ के पद पर कार्यरत हैं, बदहवास हालत में कंट्रोल रूम सागर पहुँचे। उन्होंने रोते हुए बताया कि वह मकरोनिया से ऑटो लेकर मेडिकल कॉलेज के पास जा रहे थे, लेकिन बस स्टैंड पर उतरते समय उनका बैग ऑटो में ही छूट गया।
बैग की अहमियत:
कीमती उपकरण: बैग में PFT (पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट) मशीन थी, जिसकी कीमत लगभग 2.80 लाख से 3 लाख रुपये के बीच है।
आजीविका का संकट: पंकज की मासिक आय मात्र 15,000 रुपये है। उनके लिए यह मशीन न केवल महंगी थी, बल्कि उनके रोजगार का एकमात्र साधन भी थी।
एएसपी के निर्देश और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
युवक की पीड़ा और उसकी स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने तत्काल कंट्रोल रूम प्रभारी आर के एस चौहान और स्टाफ को सक्रिय होकर बैग खोजने के निर्देश दिए।
सीसीटीवी ट्रैकिंग: महिला आरक्षक रेखा रजक एवं योगेश ने बिना समय गंवाए बस स्टैंड और मकरोनिया मार्ग के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और संबंधित ऑटो की पहचान की गई
सोशल मीडिया और वायरलेस का जाल: ऑटो के फुटेज और जानकारी को तत्काल पुलिस के सभी ग्रुपों में वायरल किया गया और शहर के सभी फिक्स पिकेट्स व थानों को अलर्ट भेजा गया।
दबाव का असर: पुलिस की सक्रियता और सूचना के प्रसार के चलते जब ऑटो चालक को जानकारी मिली, तो उसने चेक किया और पाया कि बैग सुरक्षित है।
6 घंटे का सस्पेंस और सुखद अंत
लगातार 6 घंटे की मशक्कत के बाद ऑटो चालक को थाना गोपालगंज बुलाया गया। पुलिस की मौजूदगी में बैग की जांच की गई, जिसमें कीमती PFT मशीन पूरी तरह सुरक्षित और चालू हालत में मिली।
जैसे ही पंकज दुबे को उनकी मशीन वापस मिली, जो युवक सुबह गम के आंसू रो रहा था, उसके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। पंकज ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय एवं कंट्रोल रूम के समस्त स्टाफ की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए पुलिस प्रशासन का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।
सराहनीय कार्य
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर श्री लोकेश कुमार सिन्हा के निर्देशन में प्रभारी कंट्रोल रूम आर के एस चौहान ,महिला प्रधान आरक्षक रेखा रजक आरक्षक योगेश एवं कंट्रोल रूम की टीम का सराहनीय योगदान रहा
”पुलिस का यह मानवीय चेहरा समाज में सुरक्षा और विश्वास की भावना को मजबूत करता है।”











