पाणिनीय व्याकरण आज भी महत्वपूर्ण है – डॉ. अभिज्ञान द्विवेदी

पाणिनीय व्याकरण आज भी महत्वपूर्ण है – डॉ. अभिज्ञान द्विवेदी
सागर | डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के भाषा अध्ययन शाला “लिटरेरी फ्यूचर नाउ” सीरीज में द्वितीय वक्तव्य का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भाषा विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अभिज्ञान द्विवेदी ने ” एक्सप्लोरिंग द लिंकगेस ऑफ़ ट्रांस्फोर्मेशनल जेनेरेटिव ग्रामर टू पाणिनीय ग्रामर” विषय पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया । उन्होंने पाणिनि के व्याकरण और अष्टाध्यायी के तमाम सिद्धांत और उस पर लिखे गए सभी ग्रंथों की विस्तार से चर्चा की तथापि व्याकरण को पाश्चात्य जगत के विद्वानों ने किस रूप में परिभाषित किया इस पर भी प्रकाश डाला । उन्होंने 19वीं और 20वीं शताब्दी में हुए भाषाई और व्याकरणिक बदलावों पर भी गहन दृष्टि से चर्चा की । कार्यक्रम की अध्यक्षता भाषा अध्ययनशाला की अधिष्ठाता प्रो. रश्मि सिंह ने की । कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. हिमांशु कुमार ने दिया एवं आभार हिंदी विभाग के प्रोफेसर राजेंद्र यादव द्वारा प्रकट किया गया और साथ ही साहित्य और व्याकरण के अंतर्संबंध पर चर्चा की । मंच संचालन भाषा विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य बबलू रे द्वारा किया गया । कार्यक्रम के समन्वयक के रूप में प्रोफेसर राजेंद्र यादव एवं सह समन्वयक के रूप में डॉ. वंदना राजोरिया एवं डॉ. हिमांशु कुमार उपस्थित रहे । कार्यक्रम में अंग्रेजी, उर्दू और हिंदी विभाग के समस्त अध्यापकगण एवं शोधार्थी-विद्यार्थी उपस्थित रहे।।

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