सागर पुलिस का दो दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स सम्पन्न, नए आपराधिक कानूनों पर 70 पुलिस अधिकारियों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण


सागर पुलिस का दो दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स सम्पन्न, नए आपराधिक कानूनों पर 70 पुलिस अधिकारियों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सागर पुलिस का रिफ्रेशर कोर्स सम्पन्न
BNS, BNSS और BSA के प्रावधानों पर मिला व्यवहारिक प्रशिक्षण, पुलिस अधिकारियों की विधिक दक्षता हुई मजबूत
सागर। पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार एवं पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के निर्देशन में पुलिस कंट्रोल रूम, सागर में आयोजित दो दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यवहारिक एवं विधिक रूप से दक्ष बनाना था।
प्रशिक्षण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयवीर सिंह भदौरिया एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सोलंकी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इसमें जिले के विभिन्न थानों एवं इकाइयों से लगभग 70 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।
दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रमुख प्रावधानों, अपराध अनुसंधान की नई प्रक्रिया, डिजिटल एवं वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन, गिरफ्तारी, तलाशी, जब्ती और न्यायालयीन प्रक्रिया सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
विषय विशेषज्ञों ने केस स्टडी और वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से नए कानूनों के प्रभावी अनुपालन की जानकारी दी तथा अधिकारियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
समापन अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि नए आपराधिक कानून न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित, समयबद्ध और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इनका सफल क्रियान्वयन तभी संभव है, जब पुलिस अधिकारी इनके प्रावधानों को पूरी दक्षता के साथ व्यवहार में लागू करें।
सागर पुलिस ने सभी प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का उपयोग गुणवत्तापूर्ण विवेचना, त्वरित कार्रवाई और नागरिकों को बेहतर पुलिस सेवा प्रदान करने में करने का आह्वान किया। साथ ही बताया गया कि भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि पुलिस बल को नवीन विधिक प्रावधानों और आधुनिक अनुसंधान तकनीकों से लगातार अद्यतन रखा जा सके।

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