
अग्रणी कॉलेज में “बुंदेलखंड: पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर” विषय पर हुआ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
‘बुंदेलखंड में प्रकृति के ऐतिहासिक सौंदर्य व जड़ी-बूटियों में छिपी हैं पर्यटन की असीम संभावनाएं -समाजशास्त्री डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत
‘संगोष्ठी का चिंतन बुंदेलखंड में पर्यटन व रोजगार के विकास का रोड मैप बनेगा, ज्ञान-निचोड़ से शासन एवं जनप्रतिनिधियों को कराया जाएगा अवगत’ -प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता का संकल्प
सागर/ पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर में पीएम-उषा परियोजना (सॉफ्ट कॉम्पोनेंट) की तृतीय सत्र गतिविधि के अंतर्गत “बुंदेलखंड: पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। संगोष्ठी के दूसरे दिन आयोजित विभिन्न सत्रों का भव्य शुभारंभ मुख्य अतिथियों एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर आत्मीय स्वागत किया गया।
स्थानीय संस्कृति और जड़ी-बूटियों से समृद्ध होगा पर्यटन: डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत
संगोष्ठी के सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के डायरेक्टर एकेडमिक अफेयर्स एवं प्रख्यात समाजशास्त्री डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत ने विषय की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि बुंदेलखंड में ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ चिकित्सीय जड़ी-बूटियों एवं आयुर्वेद के क्षेत्र में भू-पर्यटन (Eco-Tourism) की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए स्थानीय स्तर पर बुंदेलखंड की समृद्ध संस्कृति को गहराई से समझकर आगे लाना होगा, इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करना होगा तथा स्वयं स्वीकार करके इस संस्कृति को सम्मानित करना होगा।
पर्यटन में दक्षता से युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर: प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बुंदेलखंड पर्यटन के दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध अंचल है, आवश्यकता इन क्षेत्रों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने की है। पर्यटन क्षेत्र रोजगार सृजन की दृष्टि से विशेष है और इसमें व्यावहारिक दक्षता हासिल करने वाले युवाओं को सहज ही रोजगार प्राप्त हो जाता है। संगोष्ठी के समापन पर उन्होंने संकल्प दोहराया कि इस दो दिवसीय आयोजन से प्राप्त ज्ञान-निचोड़ एवं महत्वपूर्ण सुझावों से न केवल शासन को, बल्कि बुंदेलखंड के जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया जाएगा ताकि रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें।
गौर संग्रहालय और पर्यटन पाठ्यक्रम से बढ़ेगा शैक्षिक पर्यटन: डॉ. राकेश शर्मा
समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए पत्रकारिता विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश शर्मा ने कहा कि डॉ. हरीसिंह गौर से संबंधित साहित्य एवं दुर्लभ वस्तुओं का संग्रहालय शैक्षिक पर्यटन को नई दिशा देगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश और दुनिया को समझने की सबसे बेहतरीन व्यावहारिक किताब पर्यटन ही है, इसलिए शिक्षण संस्थानों में पर्यटन का नियमित पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया जाना चाहिए।
पर्यटन विकास के लिए सामूहिक सामाजिक प्रयास आवश्यक: डॉ. रश्मि दुबे
विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. रश्मि दुबे ने कहा कि बुंदेलखंड में पर्यटन विकास के लिए केवल शासन पर निर्भर रहने या उसे जागृत करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसके लिए सामूहिक सामाजिक प्रयास भी बेहद आवश्यक हैं।
कार्यक्रम के दौरान विशिष्ट वक्ता डॉ. किरण आर्य ने बुंदेली भाषा व संस्कृति को संरक्षण देने, डॉ. अरविंद दीक्षित ने चित्रकूट के धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों में रोजगार की संभावनाओं तथा सारस्वत अतिथि सुश्री संध्या सरवटे व श्री आशीष ज्योतिषी ने बुंदेलखंडी व्यंजनों व विरासत के संरक्षण पर विचार व्यक्त किए। सत्र में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. अरुण शुक्ला व डॉ. महेश शुक्ला उपस्थित रहे। वहीं सहायक प्राध्यापक शैलेंद्र सकवार, डॉ. कंचन प्रजापति सहित विभिन्न शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने पर्यटन व रोजगार पर केंद्रित अपने शोध-पत्रों का वाचन किया।
महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ संदीप सबलोक ने बताया कि मंगलवार 4 अगस्त को शुरू होकर दो दिनों तक चली इस महत्त्वपूर्ण संगोष्ठी का भव्य उद्घाटन डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. यशवंत सिंह ठाकुर, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अरुण तिवारी, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी रामकुमार गोस्वामी, आरोग्य भारती के जिला संयोजक डॉ. सुखदेव मिश्रा एवं पीएम-उषा परियोजना प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी की विशेष उपस्थिति में संपन्न हुआ।
प्रथम दिवस के विभिन्न सत्रों में डॉ. नीलिमा पिंपलापुरे, वरिष्ठ साहित्यकार टीकाराम त्रिपाठी, इंक मीडिया के निदेशक डॉ. आशीष द्विवेदी एवं रीवा के समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. महेश शुक्ला की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस दौरान मुख्य वक्ता डॉ. हरीसिंह गौर विवि के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. बी.के. श्रीवास्तव, डॉ. नागेश दुबे, डॉ. ललित मोहन एवं डॉ. अरुण कुमार शुक्ला समेत कई विद्वानों और शोधार्थियों ने विचार व्यक्त किए।
समापन सत्र के दौरान दौरान संगोष्ठी में उपस्थित मीडिया प्रतिनिधियों को भी स्मृति चिन्ह एवं अंग वस्त्र से सम्मानित किया गया।
संगोष्ठी के दूसरे दिन संपन्न हुए कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. राणा कुंजर एवं डॉ. प्रज्ञा दुबे द्वारा किया गया तथा अंत में डॉ. शिखा चौबे व संगोष्ठी की संयोजक श्रीमती रेणु सोलंकी ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ गोपा जैन, डॉ विनय कुमार शर्मा, डॉ अमर कुमार जैन डॉ संगीता मुखर्जी डॉ प्रतिभा जैन डॉ संगीता कुंभारे डॉ शुचिता अग्रवाल, डॉ नीलम सिंह, डॉ संदीप सबलोक, डॉ जय नारायण यादव डॉ अंकुर गौतम डॉ संदीप तिवारी डॉ कनिष्क तिवारी, भानुप्रिया पटेल, शालिनी सिंह परिहार, वसुंधरा गुप्ता समेत महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।











