
एक साल से बच्चों को नहीं पढ़ा रहे शिक्षक, बीआरसी पद पर नियुक्ति को लेकर भी उठे सवाल; शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान
देवरी। देवरी विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल डोंगर सलैया में हिंदी विषय के शिक्षक के लंबे समय से विद्यालय नहीं पहुंचने का मामला सामने आया है। विद्यालय के प्राचार्य के अनुसार हिंदी विषय के शिक्षक हरिकृष्ण चौबे करीब एक वर्ष से स्कूल में बच्चों को पढ़ाने नहीं पहुंचे हैं। वहीं, शिक्षक की अनुपस्थिति और उनके बीआरसी पद पर पदस्थ होने को लेकर स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार शासकीय हाई स्कूल डोंगर सलैया में करीब 261 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय में छह स्थायी शिक्षक एवं तीन अतिथि शिक्षक पदस्थ बताए जा रहे हैं। इनमें हिंदी विषय के शिक्षक हरिकृष्ण चौबे भी शामिल हैं। विद्यालय के प्राचार्य का कहना है कि शिक्षक के लंबे समय से विद्यालय नहीं आने के कारण विद्यार्थियों की हिंदी विषय की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्राचार्य ने बीईओ को दिया लिखित पत्र
विद्यालय के प्राचार्य गिरीश मेहरा ने बताया कि हिंदी विषय के शिक्षक हरिकृष्ण चौबे करीब एक वर्ष से विद्यालय नहीं आए हैं। उनके अनुसार शिक्षक को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बीआरसी के पद पर नियुक्त किया गया है। हिंदी विषय का शिक्षक विद्यालय में उपलब्ध नहीं होने के संबंध में उनके द्वारा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, देवरी को लिखित रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
प्राचार्य ने यह भी बताया कि विद्यालय के सरकारी रिकॉर्ड में शिक्षक के हस्ताक्षर नहीं होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में ऑनलाइन उपस्थिति किस प्रकार दर्ज हो रही है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। इस पूरे मामले की जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।
बीआरसी पद पर नियुक्ति को लेकर भी सवाल
वहीं, देवरी क्षेत्र के कुछ शिक्षकों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि हरिकृष्ण चौबे की मूल पदस्थापना माध्यमिक शिक्षक के रूप में है और इसके बावजूद उन्हें बीआरसी के पद पर नियुक्त किया गया है। शिक्षकों का दावा है कि बीआरसी पद के लिए निर्धारित पात्रता एवं नियमों की जांच की जानी चाहिए।
हालांकि, बीआरसी पद पर नियुक्ति के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित विभाग द्वारा नियुक्ति आदेश, पात्रता एवं शासन के नियमों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
261 विद्यार्थियों की पढ़ाई का सवाल
एक ओर विद्यालय में हिंदी विषय के शिक्षक के लंबे समय से अनुपस्थित रहने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता भी जताई जा रही है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी शिक्षक को विभागीय कार्य के लिए अन्य पद पर नियुक्त किया गया है, तो विद्यालय में संबंधित विषय की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था की जानी चाहिए।
जांच के बाद ही सामने आएगा सच
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिक्षक लंबे समय से विद्यालय में उपस्थित नहीं हैं, तो उनकी उपस्थिति और विभागीय कार्यप्रणाली किस प्रकार संचालित हो रही है? साथ ही बीआरसी पद पर उनकी नियुक्ति के लिए निर्धारित पात्रता पूरी होती है या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में विद्यालय के उपस्थिति रिकॉर्ड, ऑनलाइन अटेंडेंस, नियुक्ति आदेश, बीआरसी पद की पात्रता तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई की स्थिति की जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं। पूरे मामले में विभागीय जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।











