अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत जिला सागर ने दिया मुख्य मंत्री के नाम ज्ञापन दूध एवं दूध से बनी वस्तुओं में मिलावटखोरों पर कार्यवाही की मांग

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत जिला सागर ने दिया मुख्य मंत्री के नाम ज्ञापन

दूध एवं दूध से बनी वस्तुओं में मिलावटखोरों पर कार्यवाही की मांग

पूरे भारत के विभिन्न प्रदेशों और जिला में कार्यरत संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत स्वयंसेवी संगठन है। पिछले पचास वर्षों से संगठन ग्राहक जागरण, प्रशिक्षण एवम् ग्राहक समस्या समाधान के क्षेत्र में देश के 400 से अधिक ज़िलों से कार्य कर रहा है। यह वर्ष संगठन पूरे देश में अपना “स्वर्णजयंती वर्ष” मना रहा है। यह जानकारी देते हुए प्रांत सचिव डॉक्टर संदीप श्रीवास्तव जी ने बताया कि इस उपलक्ष्य में आम नागरिकों के स्वास्थ्य के विषय को लेकर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत कार्यरत है। जिला सागर में कलेक्टर कार्यालय में मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री जी के नाम ज्ञापन देते हुए निवेदन किया की
महाकौशल प्रांत जिला सागर में आपके संज्ञान में मिलावटी दूध के संदर्भ में कुछ निम्नांकित बिंदु रखना चाहता है, और अपेक्षा करता है कि उनका समुचित समाधान एवं कार्यवाही हो।

  1. एफएसएसएआई (FSSAI) के अनुसार देश भर में लगभग 70% दूध के नमूनों को मिलावटी पाया गया।
  2. कुछ राज्यों में तो 100% दूध के नमूने एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित दूध मानकों के अनुरूप नहीं थे।
  3. 14% नमूनो में डिटर्जेंट पाया गया। एफ.एस.एस.ए.आई. ने कुल 1791 नमूने का परीक्षण किया ,जिनमे 46% दूध पानी मिलावट की वजह से काम सॉलिड नॉन फैट की श्रेणी के थे, और लगभग 548 नैनो में स्कीम मिल्क पाउडर की उपस्थिति पाई गई जिनमें से 477 नमूनों में ग्लूकोज मौजूद था। सिंथेटिक और मिलावटी दूध और दूध के उत्पाद यूरिया, डिटर्जेंट, रिफाइंड तेल, कास्टिक सोडा, बोरिक एसिड, आदि का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं। जिला सचिव डॉक्टर नलिन जैन जी ने बताया कि अपने जिले में भी दूध का उत्पादन और मांग में भारी अंतर है, इसे लेकर व्यापारी दूध में मिलावट करते हैं, इसी कारण बच्चे और आम नागरिक बीमारियों का शिकार बनते हैं। जिले की तरफ से इस पर रोक लगने हेतु पर्याप्त संसाधनों की कमी के कारण मिलावट करनेवाले व्यापारियों को खुला बाजार मिलता है। ऐसे व्यापारियों पर कठोर कार्रवाई न होने के कारण , यह मिलावट का व्यापार बिना रोक-टोक फैलता है। आम नागरिक के पास दूध की शुद्धता हेतु न तो समय है, ना ही संसाधन। अत: जो भी दूध जनता को मिलता है, उसी का उपयोग करते है। उन्होंने आगे बताया कि
    अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत यह आवेदन पत्र से मांग करती है कि
  4. जिला सागर में फूड टेस्टिंग मोबाइल वैन होनी चाहिए।
  5. ⁠दूध एवं खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने हेतु फ्लाइंग स्क्वायड का गठन होना चाहिए, जिसमें एक प्रतिनिधि अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत का भी शामिल हो ।
  6. ⁠जिले में सैंपल की जांच हेतु प्रत्येक तहसील स्तर पर प्रशासन की ओर से एक ”निशुल्क ओपन टेस्टिंग सेंटर” , (खुला जांच केंद्र) होना चाहिए ।
  7. जिलें में पर्याप्त फूड इंस्पेक्टर नियुक्त किये जावे, जिससे त्वरित कार्यवाही की जा सके
  8. ⁠ प्रशासन की ओर से जांच करने पर जब दूध में मिलावट की मात्रा पाई जाती है तो, इसका व्रहत रूप से प्रचार – प्रसार सोशल मीडिया , अखबार आदि के माध्यम से होना चाहिए, ताकि आम नागरिक तक जागृति हो ।
    मिलावटी दूध का लंबे समय तक उपयोग करने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर होता है । जैसे पेट खराब होना, उल्टी दस्त, एलर्जी का होना, किडनी, लीवर, हार्ट का नुकसान होना, रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। अतः अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, सिंथेटिक और मिलावटी दूध के उत्पादन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की मांग करता है। ग्राहक पंचायत आपसे यह भी मांग करता है कि दूध में मिलावट की जिम्मेदारी तय की जाए जिस क्षेत्र में यह मिलावट पाई जाती है उसे क्षेत्र के क्षेत्र अधिकारी के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई हो.
    इस अवसर पर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत जिला सागर के अध्यक्ष श्रीराम साहू पत्रकार ने बताया कि यह जागरूकता आंदोलन किस प्रकार कार्य कर रहा है और आगामी समय में जनता के हित और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता एवम बचाव के लिए क्या क्या कार्य होंगे। आदर्श चुनाव आचार संहिता का ध्यान रखते हुए और पालन करते हुए जिला कलेक्टर सागर के कार्यालय परिसर में सीमित सदस्य की उपस्थिति में ज्ञापन सोपा गया । जिसको श्रीमान जिला कलेक्टर के माध्यम से माननीय मुख्य मंत्री मध्य प्रदेश शासन तक भेजा जाएगा। इस अवसर पर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के महाकौशल प्रांत सचिव डॉक्टर संदीप श्रीवास्तव,जिला अध्यक्ष श्रीराम साहू पत्रकार , जिला सचिव डॉक्टर नलिन जैन उपस्थित रहे।

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