
मध्यप्रदेश भोपाल विशेष संवाददाता राजकुमार दुबे
दोस्ती, फर्ज और आंसू: टीआई गौरव के आरक्षक पंकज सिंह राजपूत ने रचा इंसानियत का नया अध्याय
नरसिंहपुर से चली ट्रेन, बिछड़े बेटे को परिवार से मिला गई
नरसिंहपुर। 9 मई 2026 की रात नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन से रवाना हुई एक ट्रेन अपने साथ सिर्फ एक यात्री नहीं, बल्कि एक परिवार की बिछड़ी खुशियों को वापस लेकर उत्तरप्रदेश जा रही थी। यह कहानी है नरसिंहपुर कोतवाली में पदस्थ आरक्षक पंकज सिंह राजपूत की, जिन्होंने खाकी वर्दी के पीछे छिपे इंसानियत के चेहरे को सामने लाकर मानवता की मिसाल कायम की
उत्तरप्रदेश के गोरखपुर निवासी 44 वर्षीय उनसाद मिया सऊदी अरब में ड्राइवर का काम करते थे। अप्रैल 2026 में मानसिक स्थिति बिगड़ने पर उन्हें रियाद से भारत भेज दिया गया। मुंबई एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वह रास्ता भटक गए और कई शहरों से होते हुए मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर पहुँच गए। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह कई दिनों तक यूँ ही भटकते रहे
इसी दौरान 5 मई 2026 को उनकी मुलाकात थाना कोतवाली नरसिंहपुर में पदस्थ आरक्षक पंकज सिंह राजपूत से हुई। उनसाद की हालत देख पंकज ने उनसे दोस्ती बढ़ाई, भोजन और कपड़ों की व्यवस्था की तथा लगातार उनका भरोसा जीतने का प्रयास किया
कुछ दिनों की आत्मीयता के बाद उनसाद ने अपनी पत्नी का मोबाइल नंबर बताया। आरक्षक पंकज ने तुरंत संपर्क कर परिवार को सूचना दी। कई दिनों से लापता उनसाद के जीवित और सुरक्षित होने की खबर सुनकर परिवार की आँखों से राहत के आँसू छलक पड़े
9 मई को उनसाद के बड़े भाई जैश मोहम्मद और दो भतीजे नरसिंहपुर पहुँचे। लंबे समय बाद भाई को सकुशल सामने देखकर परिवार भावुक हो उठा। इस मिलन की सबसे बड़ी खुशी आरक्षक पंकज राजपूत के चेहरे पर साफ झलक रही थी, जिन्होंने अपने कर्तव्य से बढ़कर इंसानियत का धर्म निभाया
जब रात को उनसाद अपने परिवार के साथ ट्रेन में बैठे, तो विदाई के क्षण बेहद भावुक थे। उनसाद ने ट्रेन में बैठने से पहले पंकज को गले लगाया। ट्रेन आगे बढ़ी तो प्लेटफॉर्म पर खड़े पंकज की आँखें नम थीं
यह दृश्य बता रहा था कि खाकी सिर्फ कानून की रखवाली नहीं करती, बल्कि टूटे रिश्तों को जोड़कर खुशियों को मंजिल तक पहुँचाने का काम भी करती है
नरसिंहपुर पुलिस के इस आरक्षक पंकज सिंह राजपूत ने साबित कर दिया कि वर्दी के पीछे धड़कता दिल जब इंसानियत से भर जाता है, तो एक रेलगाड़ी खुशियों की सौगात बन जाती है











