
मानवता की मिसाल: सिंघई परिवार ने निभाई दिवंगत माता की अंतिम इच्छा, किया नेत्रदान और देहदान
सागर। दुख की घड़ी में भी समाजसेवा का अद्भुत उदाहरण पेश करते हुए सागर के वल्लभ नगर निवासी समाजसेवी पंकज सिंघई और उनके परिवार ने अपनी माताजी स्व. श्रीमती किरण सिंघई (77 वर्ष) की अंतिम इच्छानुसार नेत्रदान और देहदान कर मानवता की मिसाल कायम की है।
मंगलवार सुबह 10:15 बजे श्रीमती किरण सिंघई के निधन के तुरंत बाद उनके बड़े पुत्र पंकज सिंघई ने बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के आई बैंक से संपर्क किया। डॉ. सारिका चौहान के मार्गदर्शन में मेडिकल टीम तत्काल उनके निवास पहुँची और परिजनों की सहमति से दोनों आंखों का कॉर्निया सुरक्षित निकाला गया।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे ने बताया कि सिंघई परिवार लंबे समय से नेत्रदान के प्रति जागरूक है। इससे पहले भी पंकज सिंघई अपने पिता स्व. प्रकाश सिंघई का नेत्रदान करा चुके हैं।
नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार ने दिवंगत माताजी के पार्थिव शरीर को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को शिक्षण एवं अनुसंधान के लिए सौंप दिया। मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन के अनुसार, यह परिवार पहले भी देहदान जैसे पुनीत कार्यों में सहभागी रहा है। उनके पिता और ताऊजी का देहदान भी इसी संस्थान में किया जा चुका है।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
शासन के निर्देशानुसार यह बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज का नौवां देहदान था, जिसे “गार्ड ऑफ ऑनर” के साथ सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। इस अवसर पर विधायक शैलेंद्र जैन, अधिष्ठाता डॉ. पी.एस. ठाकुर तथा एनाटॉमी विभाग का पूरा स्टाफ उपस्थित रहा।
डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने सिंघई परिवार के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रेरणादायी कदम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि पंकज सिंघई न केवल स्वयं अंगदान और देहदान जैसे कार्य कर रहे हैं, बल्कि लगातार समाज को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं।
प्रमुख जानकारी
दिवंगत: स्व. श्रीमती किरण सिंघई (77 वर्ष)
परिजन: पंकज सिंघई, आशीष सिंघई, अतुल सिंघई एवं श्रीमती शालिनी सिंघई
निवास: वल्लभ नगर वार्ड, सागर











