योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है:डॉ. लता वानखेड़े

योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है:डॉ. लता वानखेड़े

सागर, 21 जून। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के योग शिक्षा विभाग एवं योग एवं ध्यान केन्द्र द्वारा 12वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 का मुख्य समारोह रविवार को महर्षि पतंजलि भवन में हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राध्यापकगण, अधिकारीगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं योग साधकों ने सहभागिता करते हुए सामूहिक योगाभ्यास किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सागर लोकसभा क्षेत्र की सांसद माननीया डॉ. लता वानखेड़े उपस्थित रहीं। समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाई. एस. ठाकुर ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में कुलसचिव डॉ. एस. पी. उपाध्याय उपस्थित रहे। कार्यक्रम का निर्देशन योग शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार जैन के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

प्रातःकालीन सत्र में प्रतिभागियों ने
माननीय प्रधानमंत्री के अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस संदेश का सामूहिक श्रवण किया तथा सामान्य योग अभ्यास क्रम के अनुसार योगाभ्यास किया। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन के साथ विभागीय कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ तथा अतिथियों का शाल, श्रीफल, पौधा एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर स्वागत एवं सम्मान किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत पी.जी. द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों देवेश एवं लक्ष्मण द्वारा प्रस्तुत “दीप योग” विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों द्वारा राजस्थानी एवं छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, एकल नृत्य तथा संगीतमय योगासन की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्हें उपस्थित जनसमुदाय ने खूब सराहा।

स्वागत उद्बोधन में विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार जैन ने योग के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए नियमित योगाभ्यास को स्वस्थ जीवन का आधार बताया। कुलसचिव डॉ. एस. पी. उपाध्याय ने योग को अनुशासित एवं संतुलित जीवन का माध्यम बताया, तथा योग की वैज्ञानिक उपयोगिता एवं मानव कल्याण में उसकी भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

मुख्य अतिथि माननीया डॉ. लता वानखेड़े ने कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है, जिसने आज सम्पूर्ण विश्व को स्वास्थ्य एवं समरसता का संदेश दिया है। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. वाई. एस. ठाकुर ने कहा कि योग शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास का सशक्त माध्यम है तथा इसे जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए।

इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अरुण कुमार साव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. महेन्द्र कुमार शर्मा द्वारा किया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन के लिए नियमित योगाभ्यास का संकल्प लिया।

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