अविराज सिंह ने कहा—अहंकार, मोह और अज्ञान का त्याग ही शिव भक्ति का सच्चा मार्ग

सागर। सावन महोत्सव के चौथे सोमवार के अवसर पर महाकाल धाम, खैजरा दरबार मंदिर में भगवान महाकाल के भव्य नगर भ्रमण एवं पालकी यात्रा का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। आयोजन में युवा नेता अविराज सिंह ने सहभागिता करते हुए भगवान शिव की महिमा और सावन मास के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान शिव हमें सादगी, भक्ति, ज्ञान, चरित्र और विनम्रता का संदेश देते हैं तथा मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके पद, धन या वैभव से नहीं, बल्कि उसके आचरण से होती है।

अविराज सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान शिव का संबंध अत्यंत श्रद्धा और भक्ति का है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण से युद्ध से पहले भगवान श्रीराम ने शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की आराधना की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने रावण का वध किया। उन्होंने कहा कि सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है।

उन्होंने कहा कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने की धार्मिक मान्यता है और इस अवधि में सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है। यही कारण है कि सावन मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है।

अविराज सिंह ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं में माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए सावन मास में कठोर तपस्या किए जाने का उल्लेख मिलता है। भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा भी इसी श्रद्धा से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है और श्रद्धालु इसे भक्ति एवं आस्था के साथ अर्पित करते हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव सत्य, सुंदर, अनादि और अनंत स्वरूप हैं। उन्हें आशुतोष भी कहा जाता है, क्योंकि वे अत्यंत सरलता से प्रसन्न होने वाले देव माने जाते हैं। श्रद्धा से अर्पित किया गया एक बेलपत्र और जल भी भगवान शिव की पूजा में विशेष महत्व रखता है।

अविराज सिंह ने कहा कि भगवान शिव का स्वरूप हमें सादगी का संदेश देता है। उनके मस्तक पर चंद्रमा, जटाओं में गंगा और तीसरा नेत्र उनके स्वरूप की विशिष्टता को दर्शाता है, लेकिन वे राजसी वैभव से दूर कैलाश पर निवास करते हैं और भस्म धारण करते हैं। उन्होंने कहा कि शिव का जीवन हमें बताता है कि वास्तविक महानता दिखावे और वैभव में नहीं, बल्कि सादगी और आत्मिक शक्ति में है।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने मानव जीवन को सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह दिया है कि किसी व्यक्ति का सम्मान उसके पद, धन या वैभव से नहीं होता। व्यक्ति की पहचान उसके ज्ञान, भक्ति, चरित्र और विनम्रता से होती है। उन्होंने कहा कि अहंकार, अज्ञान, माया और मोह का त्याग कर शिव की भक्ति करना ही जीवन का वास्तविक आनंद और आध्यात्मिक कैलाश है।

अविराज सिंह ने कहा कि भारतीय धार्मिक परंपरा में भगवान शिव की स्तुति के लिए अनेक स्तोत्रों का विशेष महत्व है। इनमें शिव तांडव स्तोत्र और मां महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें भगवान शिव की कृपा से दोनों स्तोत्र कंठस्थ हैं।

उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि वे बताएं कि उन्हें कौन-सा स्तोत्र सुनना है, उसके अनुसार वे शिव तांडव स्तोत्र अथवा मां महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ करेंगे। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का वातावरण दिखाई दिया।

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