
सागर, 14 सितंबर। नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और माताओं को स्तनपान के वैज्ञानिक महत्व की जानकारी देने के उद्देश्य से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), सागर द्वारा स्तनपान जागरूकता कार्यक्रम आयुष्मान आरोग्य मंदिर सनोधा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं, नवमाताओं और उनके परिवारों को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने तथा छह माह तक केवल मां का दूध देने के बारे में जागरूक किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि जन्म के बाद शुरुआती समय शिशु के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने बताया के जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करना और पहले छह माह तक केवल मां का दूध देना शिशु को जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत देता है। मां का दूध बच्चे के लिए संपूर्ण पोषण के साथ संक्रमणों से बचाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि जन्म के बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध कोलोस्ट्रम कहलाता है। इसे कई बार परिवार के लोग सामान्य दूध से अलग समझकर बच्चे को देने से रोकते हैं, जबकि यह नवजात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसमें ऐसे पोषक तत्व और प्रतिरक्षात्मक घटक होते हैं जो बच्चे की शुरुआती सुरक्षा में मदद करते हैं।
उन्होंने परिवारों से अपील की कि मां को भावनात्मक और व्यावहारिक सहयोग दें, ताकि वह बच्चे को समय पर और सही तरीके से स्तनपान करा सके।
उन्होंने बताया कि स्तनपान केवल बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद गर्भाशय को सामान्य स्थिति में लौटने में मदद मिलती है और मां एवं बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है।
कार्यक्रम में डॉ साद ने माताओं को बताया कि सामान्य परिस्थितियों में जन्म से छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध देना चाहिए। इस अवधि में पानी, शहद, घुट्टी, चाय या अन्य तरल पदार्थ देने की आवश्यकता नहीं होती। छह माह पूरे होने के बाद स्तनपान जारी रखते हुए बच्चे को उम्र के अनुसार पौष्टिक पूरक आहार शुरू किया जाना चाहिए।
डॉ साद ने कहा कि शिशु को स्तनपान उसकी मांग के अनुसार कराया जाना चाहिए। बच्चे के भूख के संकेतों को समझना और सही तरीके से स्तनपान कराना मां और बच्चे दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
कामकाजी माताओं को भी दिया संदेश
कार्यक्रम में कामकाजी माताओं की समस्याओं पर भी उन्होंने चर्चा की।डॉ साद ने महिलाओं को बताया कि काम या अन्य व्यस्तताओं के बावजूद स्तनपान जारी रखने की योजना बनाई जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर मां का निकाला हुआ दूध स्वच्छ तरीके से सुरक्षित रखकर शिशु को दिया जा सकता है।
साथ ही उन्होंने ने माताओं को पर्याप्त पौष्टिक भोजन, पर्याप्त पानी, आराम और परिवार के सहयोग के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने किसी भी स्तनपान संबंधी समस्या, जैसे बच्चे का दूध न पीना, स्तन में तेज दर्द या अन्य परेशानी होने पर स्वास्थ्यकर्मी या चिकित्सक से सलाह लेने की अपील की।
कार्यक्रम में कहा डॉ साद ने बताया कि समाज में स्तनपान को लेकर कई पारंपरिक धारणाएं और भ्रांतियां आज भी मौजूद हैं। परिवार के बुजुर्गों और पति की सकारात्मक भूमिका मां को स्तनपान जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग दे सकती है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में पिरामल स्वास्थ्य की आयुषी शुक्ला का महत्वपूर्ण योगदान रहा। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों और नागरिकों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।











