कूनो और गांधीसागर के बाद मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बनेगा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व
सागर, 6 अक्टूबर 2026। वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर सागर और बुंदेलखंड के लिए वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए दो चीतों को विमुक्त करेंगे। इसके साथ ही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन जाएगा।
चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, स्थानीय व्यवसाय और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
439 हेक्टेयर में तैयार किया गया सुरक्षित आवास
चीतों के अनुकूलन और सुरक्षा के लिए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। यहां आधुनिक बाड़ों (बोमा) सहित आवश्यक सुविधाओं से युक्त सुरक्षित आवास तैयार किया गया है।
वन विभाग द्वारा चीतों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित एवं अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है।
मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है।
वर्ष 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के साथ एकीकृत करने के बाद 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। यहां बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू सहित अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं। यह क्षेत्र संकटग्रस्त भारतीय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
चीता पुनर्स्थापना अभियान को मिलेगा नया विस्तार
भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए।
अब मध्यप्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों में भी इस अभियान का विस्तार किया जा रहा है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों की विमुक्ति इसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।
देश में चीतों की संख्या 60 हुई
5 अक्टूबर 2026 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं।
7 अक्टूबर को कूनो से नर चीता थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीते रहेंगे।
वहीं गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक, मादा धीरा तथा सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाकर विमुक्त की गई मादा राधा मौजूद हैं।
बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड के वन्यजीव पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। दो चीतों की विमुक्ति के साथ मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान अब एक नए चरण में प्रवेश करेगा और सागर सहित पूरे बुंदेलखंड के लिए यह वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन एवं रोजगार की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।







