शिक्षाशास्त्र विभाग, डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के लिए अत्यंत गर्व और ऐतिहासिक उपलब्धि का क्षण है कि ITEP B.Com B.Ed. सातवें सेमेस्टर की दो छात्र शोध टीमों को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् (ICSSR), नई दिल्ली द्वारा प्रतिष्ठित “ICSSR युवा शोध प्रतिभा योजना: Youth and Decolonisation” के अंतर्गत शोध परियोजना स्वीकृति प्राप्त हुई है।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि वर्तमान ITEP बैच भारत में चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के प्रथम बैचों में से एक है, और मध्यप्रदेश से डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय को यह गौरवपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ है। ITEP B.Com B.Ed. की दो छात्र शोध टीमों का चयन विभाग की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध अभिवृत्ति और नवाचार भावना को दर्शाता है।
पहली परियोजना ₹2,50,000/- की स्वीकृत राशि के साथ भूमिका चौरसिया के नेतृत्व में विदि आनंद अहिरवार और प्रियंश चढ़ार द्वारा प्रस्तुत की गई है। इस परियोजना का शीर्षक है— “Indian Philosophy-Based Psychological Intervention for Enhancing Well-being, Resilience and Academic Engagement among Secondary Students.”
दूसरी परियोजना ₹2,40,000/- की स्वीकृत राशि के साथ अक्षय दुबे के नेतृत्व में तरुण रिछारिया और उन्नति राज द्वारा प्रस्तुत की गई है। इस परियोजना का शीर्षक है— “Developing and Testing a TEK-Based Environmental Conservation Module for Secondary School Students.”
माननीय कुलपति प्रो. नागेश दुबे ने छात्र शोध टीमों की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए सभी चयनित विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं। उन्होंने शिक्षाशास्त्र विभाग की इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय बताते हुए विभाग के समस्त संकाय सदस्यों, शोध मार्गदर्शक और विद्यार्थियों को उनके शैक्षणिक प्रयासों, शोध अभिरुचि और नवाचारपूर्ण कार्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। प्रो. अनिल कुमार जैन, विभागाध्यक्ष, शिक्षाशास्त्र विभाग एवं अधिष्ठाता, शैक्षिक अध्ययन शाला, सहित विभाग के सभी संकाय सदस्यों ने छात्र शोध टीमों को इन परियोजनाओं के सफल संचालन हेतु अपना सहयोग, प्रोत्साहन और शुभकामनाएँ प्रदान की हैं।
दोनों परियोजनाएँ डॉ. प्रवीण कुमार टी. डी., सहायक आचार्य, शिक्षाशास्त्र विभाग के मार्गदर्शन में संचालित की जाएँगी।
यह उपलब्धि शिक्षाशास्त्र विभाग के लिए एक गौरवपूर्ण मील का पत्थर है तथा भावी शिक्षक-शिक्षार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।







