पारंपरिक माटी की महक के साथ आयोजित हुई संभाग स्तरीय मलखंब प्रतियोगिता : अग्रणी महाविद्यालय ने मारी बाज़ी

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पारंपरिक खेल शारीरिक सौष्ठव के साथ मानसिक एकाग्रता और अनुशासन गढ़ते हैं — प्राचार्य प्रो. सरोज गुप्ता

पारंपरिक खेलों को जन-जन तक पहुँचाना युवाओं को भटकाव से बचाकर अनुशासित बनाता है — श्याम तिवारी

सागर/ मध्य प्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार भारतीय संस्कृति और प्राचीन खेलों को पुनर्जीवित करने की दिशा में शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर की प्राचार्य प्रोफेसर सरोज गुप्ता के कुशल निर्देशन में संभाग स्तरीय मलखंब प्रतियोगिता का अत्यंत रोमांचक और भव्य आयोजन किया गया। युवा पीढ़ी को उनकी मिट्टी से जोड़ने वाली इस अनूठी परंपरा के लगातार दूसरे वर्ष भी महाविद्यालय केंद्र बिंदु बना, जहाँ खिलाड़ियों ने अपने अद्भुत संतुलन और अदम्य साहस से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रतियोगिता का गरिमामय शुभारंभ भारतीय संस्कृति की परंपरा के अनुसार सर्वप्रथम मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी एवं विशिष्ट अतिथियों—जिला उपाध्यक्ष निकेश गुप्ता तथा क्षेत्रीय खेल संचालक श्रीमती शर्मिला डाबर की उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा पवनपुत्र भगवान श्री हनुमान जी के पूजन-अर्चन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ विधिवत संपन्न हुई, जिसके पश्चात महाविद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।
समारोह के स्वागत उद्बोधन में महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर सरोज गुप्ता ने कहा कि मलखंब जैसे प्राचीन और पारंपरिक खेल न केवल शारीरिक सौष्ठव को तराशते हैं, बल्कि विद्यार्थियों में मानसिक एकाग्रता, अनुशासन और संकट के समय त्वरित निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित करते हैं। मुख्य अतिथि श्याम तिवारी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि इस तरह के पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देना और उन्हें जन-जन तक पहुँचाना उच्च शिक्षा विभाग की एक सराहनीय पहल है, जो युवाओं को भटकाव से बचाकर अनुशासित बनाती है। इसके पश्चात विशिष्ट अतिथि निकेश गुप्ता ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें सच्ची खेल भावना के साथ मैदान में उतरने की प्रेरणा दी।
प्रतियोगिता के संगठन सचिव एवं क्रीड़ा अधिकारी डॉ. दयाराम राजपूत ने रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस रोमांचक संभाग स्तरीय स्पर्धा में संभाग के चार प्रमुख महाविद्यालयों— शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय सागर, पी.एम. श्री शासकीय महाविद्यालय मकरोनिया, शासकीय महाविद्यालय शाहगढ़ तथा शासकीय कन्या महाविद्यालय सागर के खेल दलों ने अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया। मुख्य निर्णायक श्यामपाल, जयदीप, चेतन जाटव, सुमित एवं बृजेश की निष्पक्ष देखरेख में खिलाड़ियों ने मलखंब के खंभे पर जैसे ही अपने कठिन करतब और कलाबाजियाँ दिखाईं, पूरा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।
दिनभर चले कड़े और रोमांचक मुकाबलों के बाद शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर की टीम ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए विजेता (चैंपियन) का खिताब अपने नाम किया, जबकि शासकीय महाविद्यालय शाहगढ़ की टीम उपविजेता रही। प्रतियोगिता के भव्य समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में उच्च शिक्षा विभाग क्षेत्रीय कार्यालय सागर संभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. रामकुमार गोस्वामी, प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता, डॉ. इमराना सिद्दीकी एवं डॉ. अमर कुमार जैन ने विजेता व उपविजेता टीमों को शील्ड और प्रमाण पत्र प्रदान कर गौरवान्वित किया।
इस अवसर पर रानी अवंती बाई विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग संचालक डॉ. सत्यनारायण लढ़िया, खेल विशेषज्ञ डॉ. रघुवीर सिंह राणा (शासकीय महाविद्यालय बंडा), तथा ऋषिकुल मलखंब अकादमी से श्रीमती वर्षा तिवारी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का बेहद शानदार और जीवंत मंच संचालन क्रीड़ा अधिकारी डॉ. अजय व्यास द्वारा किया गया। इस महाआयोजन को सफल बनाने में डॉ. विकाश चन्द्र त्रिपाठी, आयुष बड़कुल, डॉ प्रज्ञा दुबे, देवकृष्ण नामदेव एवं प्रमोद सेन का विशेष योगदान रहा। विभिन्न दलों के साथ डॉ. खिज्र अहमद खान, संतोष कोरी एवं सुश्री कीर्ति डाबर उपस्थित रहे।
इस प्रतियोगिता के संबंध में महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. संदीप सबलोक ने बताया कि प्राचार्य प्रोफेसर सरोज गुप्ता के निर्देशन में संपन्न हुई यह प्रतियोगिता बुंदेलखंड की माटी के संस्कार और हमारी गौरवशाली परंपराओं को सहेजने का एक अनूठा माध्यम रही है। “महक कभी गुजरती नहीं है, बिखरती है,” और इसी माटी की खुशबू के साथ संपूर्ण प्रतियोगिता भारत माता व वंदे मातरम के गगनभेदी जयकारों तथा “पढ़ो बेटी, खेलो बेटी, आगे बढ़ो बेटी” के ओजस्वी संदेश के साथ ऐतिहासिक सफलता के साथ संपन्न हुई।

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