सागर कलेक्टर के निर्देश- 20 मई से मिशन मोड पर होगा बंडा परियोजना में विस्थापन का कार्य

कलेक्टर के निर्देश- 20 मई से मिशन मोड पर होगा बंडा परियोजना में विस्थापन का कार्य

तीन दिन के भीतर डिस्मेंटल होंगे सभी शासकीय भवन; कॉलोनी में मिलेंगी सभी बुनियादी सुविधाएं

चारागाह और चारा भूमि का विशेष प्रबंध करने के दिए निर्देश

सुरक्षा, समझाइश और संवेदनशीलता के साथ होगा विस्थापन, अतिरिक्त पुलिस बल रहेगा तैनात

परियोजना से कुल 80,000 हेक्टेयर ज़मीन में होगी सिंचाई

क्षेत्र के कुल 278 गाँवों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

412 गाँवों के निवासियों के लिए मिलेगा पीने का पानी

सागर 13 मई 2026
बंडा वृहद (उल्दन) परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले ग्रामों के विस्थापन को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। कलेक्टर  प्रतिभा पाल ने स्पष्ट किया है कि जून माह में बांध का भराव शुरू होने से पहले, 20 मई से सभी प्रभावित गांवों के परिवारों को विस्थापन कॉलोनी में सुरक्षित शिफ्ट किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि डूब क्षेत्र के सभी शासकीय भवनों—स्कूल, आंगनवाड़ी, थाना और चिकित्सालय को आगामी तीन दिनों के भीतर डिस्मेंटल करने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि विस्थापन प्रक्रिया समझाइश और संवेदनशीलता के साथ करें।

बैठक में पुलिस अधीक्षक  अनुराग सुजानिया ने निर्देश दिए कि विस्थापन की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए प्रभावित ग्रामों में गुरुवार से ही अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से महिला पुलिस बल की तैनाती और ग्रामीणों को समझाइश देकर स्वेच्छा से विस्थापित होने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।

कलेक्टर  पाल ने कहा कि शासकीय भवनों को गिराने की कार्यवाही भी पुलिस की मौजूदगी में की जाएगी। उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निर्देश दिए कि विस्थापन क्षेत्रों में न केवल नागरिकों के लिए मूलभूत सुविधाएं जैसे पानी, बिजली, चिकित्सा, स्कूल आदि हों बल्कि विस्थापितों के पशुओं के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था की जाए। पशुओं के लिए चारा भूमि (चारागाह) और अन्य प्रबंध तत्काल सुनिश्चित किए जाएं। नई बस्ती में शुद्ध पेयजल और बिजली के कनेक्शन प्राथमिकता से उपलब्ध कराए जाएं।

‘ऑन द स्पॉट’ होगा मुआवजे और विधिक समस्याओं का समाधान

प्रशासन ने मुआवजा वितरण और विधिक सहायता के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। एडीएम/एसडीएम के नेतृत्व में एक विशेष सेल सप्ताह के सातों दिन कार्य करेगा। जिन ग्रामीणों के आर्बिट्रेशन संबंधित केस या भू-अर्जन की राशि नहीं मिली है, उन्हें शिविरों में बुलाकर आवश्यक दस्तावेज लेकर तत्काल कार्यवाही की जाएगी। साथ ही
एसडीएम और एसडीओपी 20 मई तक प्रभावित गांवों में निरंतर शिविर लगाकर लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे।

बैठक में विस्थापन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए 3 दिन में सभी शासकीय भवनों को डिस्मेंटल करने,
20 मई से विस्थापित परिवारों को कॉलोनी में शिफ्ट करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से करने के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने एसडीएम और एसडीओपी को आगामी 7 दिनों तक लगातार फील्ड पर रहकर प्रगति की निगरानी करने के भी निर्देश दिए हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री विवेक केवी, अपर कलेक्टर श्री अविनाश रावत, बंडा एसडीएम श्रीमती आरती यादव सहित सभी संबंधित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

सिंचाई के रकबे में होगी भारी बढ़ोतरी

दिसंबर 2026 तक खेतों में पहुँचेगा पानी

बंडा वृहद सिंचाई परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होने वाली है। परियोजना के लिए ₹3219.62 करोड़ की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। इस योजना के पूर्ण होते ही सागर जिले की बंडा, शाहगढ़, मालथौन और छतरपुर की बक्सवाहा तहसील के किसानों का भाग्य बदल जाएगा।

बंडा परियोजना से कुल 80,000 हेक्टेयर (लगभग 5 लाख एकड़) कमाण्ड क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य है। अत्याधुनिक पाइप प्रणाली से होने वाली सिंचाई का वितरण निम्नानुसार होगा-
बंडा तहसील: 35,253 हेक्टेयर सिंचित भूमि,
मालथौन तहसील: 16,266 हेक्टेयर सिंचित भूमि,
बक्सवाहा (छतरपुर): 13,379 हेक्टेयर सिंचित भूमि,
शाहगढ़ तहसील: 10,675 हेक्टेयर सिंचित भूमि,
412 गाँवों के लिए पेयजल और औद्योगिक विकास

बंडा परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बहुउद्देशीय योजना है। बाँध की 313.07 मि.घ.मी. जल भराव क्षमता में से 16.11 मि.घ.मी. पानी 412 गाँवों की पेयजल व्यवस्था हेतु आरक्षित किया गया है। सौरई औद्योगिक क्षेत्र के लिए 1.018 मि.घ.मी. पानी सुरक्षित रखा गया है, जिससे क्षेत्र में औद्योगीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

परियोजना की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, बाँध निर्माण का 75 प्रतिशत कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। निर्माण एजेंसी द्वारा बाँध के कंक्रीट भाग का 90% काम पूरा कर लिया गया है। विभाग ने जून 2026 तक बाँध का काम और दिसंबर 2026 तक प्रेशराईज्ड पाईप प्रणाली सहित समस्त कार्यों को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा है।

बाँध की कुल लंबाई 926 मीटर है, जिसमें 756 मीटर मिट्टी का और 170 मीटर कंक्रीट का हिस्सा है। पाइप लाइन बिछाने का कार्य 45% पूर्ण हो चुका है। इस प्रणाली से किसानों को सीधे खेतों में पर्याप्त दबाव के साथ पानी मिलेगा, जिससे श्रम और पानी दोनों की बचत होगी।

Leave a Comment

Read More