36.45 करोड़ की सांदीपनि स्कूल बिल्डिंग में पहली बारिश में रिसाव, जांच कब? कार्रवाई किस पर? सागर कलेक्टर देवरी दौरे में निरीक्षण नहीं होने पर उठे सवाल

36.45 करोड़ की सांदीपनि स्कूल बिल्डिंग में पहली बारिश में रिसाव, जांच कब? कार्रवाई किस पर? सागर कलेक्टर देवरी दौरे में निरीक्षण नहीं होने पर उठे सवाल

दैनिक प्रवेश संवाद समाचार पत्र इस जनहित के मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा और जांच तथा कार्रवाई होने तक प्रशासन से जवाब मांगता रहेगा।

देवरी कला, देवरी के शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की लगभग 36 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से निर्मित नई भवन में पहली ही बारिश के दौरान पानी रिसने के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। लगातार खबरें सामने आने के बावजूद अब तक न तो निर्माण की गुणवत्ता की जांच हुई है और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी अथवा निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई हुई है।
मंगलवार को देवरी में आयोजित जनसुनवाई के दौरान जब सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल से इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “शासकीय सांदीपनि उच्च माध्यमिक विद्यालय तो अभी नया बना है। यदि बिल्डिंग से पहली बारिश में पानी रिसने लगा है तो जांच करवा लेती हूं।” हालांकि अब बड़ा सवाल यह है कि जांच कब होगी और दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?
देवरी दौरे के दौरान कलेक्टर प्रतिभा पाल ने झुनूकू पुल का निरीक्षण किया, नगर पालिका परिषद पहुंचीं और एसडीएम कार्यालय में जनसुनवाई कर आम नागरिकों की समस्याएं सुनीं। लेकिन इतने चर्चित और करोड़ों रुपये की लागत से बने शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का निरीक्षण नहीं किया गया। इसे लेकर स्थानीय लोगों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने बड़े मामले को प्रशासन ने गंभीरता से क्यों नहीं लिया।
गौरतलब है कि इस विद्यालय का लोकार्पण प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया गया था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही समय बाद पहली बारिश में भवन के विभिन्न हिस्सों से पानी रिसने की शिकायतें सामने आने लगीं। इससे निर्माण की गुणवत्ता और कार्यदायी एजेंसी की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब तक न तो शिक्षा विभाग, न जिला प्रशासन और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि से बने भवन की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि निर्माण में लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—36.45 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में पहली ही बारिश में पानी रिसने का जिम्मेदार कौन है? ठेकेदार, निर्माण एजेंसी या निगरानी करने वाले अधिकारी?
दैनिक प्रवेश संवाद समाचार पत्र इस जनहित के मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा और जांच तथा कार्रवाई होने तक प्रशासन से जवाब मांगता रहेगा।

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