लोक संस्कृति संरक्षण की सशक्त पहल : पद्मश्री रामसहाय पांडे की स्मृति में आयोजित कला कार्यशाला में बच्चों की प्रतिभा को मिल रहा नया आयाम, विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने किया निरीक्षण

लोक संस्कृति संरक्षण की सशक्त पहल : पद्मश्री रामसहाय पांडे की स्मृति में आयोजित कला कार्यशाला में बच्चों की प्रतिभा को मिल रहा नया आयाम, विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने किया निरीक्षण

सागर। बुंदेलखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा एवं कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से बुंदेली लोक नृत्य व नाट्य कला परिषद, कनेरा देव मध्यप्रदेश द्वारा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आयोजित 15 दिवसीय निःशुल्क कला कार्यशाला इन दिनों उत्साह, रचनात्मकता और सांस्कृतिक वातावरण के बीच संचालित हो रही है। कार्यशाला में लोक नृत्य, लोक नाट्य के साथ-साथ पेंटिंग एवं पोर्ट्रेट कला का प्रशिक्षण भी बच्चों एवं युवाओं को प्रदान किया जा रहा है।

कार्यक्रम के तृतीय एवं अंतिम चरण में “पोर्ट्रेट पेंटिंग कार्यशाला” का शुभारंभ नगर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ ही पूरे परिसर में भारतीय संस्कृति एवं लोक परंपराओं की सुंदर छटा देखने को मिली।

इस अवसर पर विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने श्रद्धेय रामसहाय पांडे के लोक कला क्षेत्र में दिए गए अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने बुंदेली लोक संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि लोक कलाएं हमारी सांस्कृतिक आत्मा हैं और इन्हें सहेजना एवं आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

विधायक जैन ने परिषद द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए संस्था के अध्यक्ष एवं सचिव संतोष पांडे की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संतोष पांडे वर्षों से समर्पण, निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ बुंदेली लोक कला, लोक नृत्य एवं लोक नाट्य के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद जिस प्रकार वे ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर नई पीढ़ी में सांस्कृतिक चेतना जागृत करने का कार्य कर रहे हैं, वह अत्यंत प्रेरणादायी है।

कार्यक्रम में उपस्थित कला प्रेमियों, जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने भी परिषद के प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं लोक संस्कृति संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित हो रही हैं। उपस्थितजनों ने माना कि बुंदेली लोक कला को नई पहचान दिलाने में परिषद एवं संतोष पांडे का योगदान उल्लेखनीय है।

कार्यशालाओं का संचालन अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में किया जा रहा है, जिनमें लोक नृत्य के गुरु प्रदीप कुर्मी, लोक नाट्य के गुरु संतोष रामसहाय पांडे एवं पोर्ट्रेट पेंटिंग के गुरु हेमंत ताम्रकार प्रमुख हैं। उनके निर्देशन में प्रतिभागी बच्चे कला प्रशिक्षण के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों को भी आत्मसात कर रहे हैं।

यह 15 दिवसीय कार्यशाला आगामी 26 मई 2026 को भव्य समापन समारोह के साथ संपन्न होगी। समापन अवसर पर प्रतिभागी बच्चों द्वारा तैयार की गई उत्कृष्ट कला कृतियों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

कार्यक्रम में अधिवक्ता रामनरेश सिंह राजपूत, अनिल श्रीवास्तव, इंजी. राजीव चौरसिया, अमित आठिया, अभिषेक द्विवेदी, प्रदीप कुर्मी, रवि आठिया, अजय सेन, कृष्णकांत नगाइच सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी, अभिभावक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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