
कविताओं में दिखे भाव, संवेदना और समाज की तस्वीर
सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में केन्द्रीय राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा हिंदी माह–2026 के अंतर्गत बुधवार को रंगनाथन सभागार में ‘काव्यांजलि एवं स्वरचित कविता पाठ’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने अपनी स्वरचित कविताओं के माध्यम से भावनाओं, सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन जीवन के विभिन्न पक्षों को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए हिंदी माह- 2026 के संयोजक तथा संयुक्त कुलसचिव एवं प्रभारी राजभाषा अधिकारी श्री संतोष सोहगौरा ने कहा कि कविता केवल शब्दों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि मनुष्य के अनुभवों, संवेदनाओं और विचारों को समाज तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। विश्वविद्यालय में आयोजित ऐसे कार्यक्रम कर्मचारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को अपनी सृजनात्मक प्रतिभा को सामने लाने का अवसर देते हैं। हिंदी माह के दौरान साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से हिंदी के प्रति आत्मीयता और रचनात्मक जुड़ाव को और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वरचित कविता पाठ जैसी गतिविधियां कार्यालयीन वातावरण में भी रचनात्मकता और संवेदनशीलता को बढ़ावा देती हैं तथा हिंदी को केवल कामकाज की भाषा नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति और सृजन की भाषा के रूप में स्थापित करती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सूक्ष्म-जीवविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. नवीन कानगो ने अपनी ग़ज़लों की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अवधेश प्रताप सिंह तोमर एवं सह-समन्वयक श्री हर्ष तिवारी ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कुलसचिव डॉ. सत्यप्रकाश उपाध्याय की कविता ‘बेटी’ को मंच एवं श्रोताओं द्वारा खूब सराहा गया। राजभाषा प्रकोष्ठ की ओर से आभार ज्ञापन अभिषेक सक्सेना ने किया। विशेष सहयोग श्री विनोद रजक का रहा। काव्यांजलि कार्यक्रम में ईएमएमआरसी निदेशक डॉ. पंकज तिवारी, उप-कुलसचिव श्री सतीश कुमार, विधि अधिकारी श्री ब्रजभूषण सिंह राजपूत, सहायक प्राध्यापक डॉ. राहुल स्वर्णकार, डॉ. हिमांशु कुमार, डॉ. श्याम सुंदर देवलिया, डॉ. देवकीनंदन, श्री आकाश मालवीय, सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ से श्री रूपेन्द्र चौरसिया एवं श्री सचिन सिंह गौतम, डॉ. उदय श्रीवास्तव, रजनीश जैन, रोहित रघुवंशी, आकांक्षा पाण्डेय, प्रबल पाण्डेय, नीतेश जैन, मनीष गौतम, डी.के. सिलार, स्तुति खंपरिया, अंशुल आठिया, यश गोदरे, अमन, नरेश, प्रवीन, गोविंद, सौम्या, नीलम, अभिरुद्र, जिया, दर्शना एवं सृष्टि सहित विश्वविद्यालय परिवार के सम्माननीय सदस्यों ने सहभागिता की। सभागार में कविताओं की प्रस्तुति के दौरान श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया।








