
विधायक शैलेंद्र जैन ने विधानसभा में सत्ता पक्ष की ओर से हिस्सा लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
सागर विधायक शैलेन्द्र कुमार जैन ने विधानसभा में बजट पर चर्चा करते हुये कहा कि, मध्यप्रदेश सरकार के इस लोक कल्याणकारी एवं विकास की गति को नई दिशा देने वाले इस जानदार और शानदार बजट के लिए मैं मध्यप्रदेश की जनता की ओर से बहुत बहुत साधुवाद देता हूँ बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ, बधाई देता हूँ उन्होंने कहा कि आईएमएफ, ने अभी 14 जून, 2024 के जो आंकड़े प्रस्तुत किए हैं उन आंकड़ों के हिसाब से हमारा देश पूरे विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, यह बजट बंद कमरों में एयर कंडीशनर कमरों में बैठकर तैयार नहीं किया गया है। यह एक परम्परा डाली गई है पिछले अनेक वर्षों में कि हम समाज के अर्थशास्त्रीगण, हमारे बुद्धिमान लोग, हमारे मनीषी लोग उनके साथ चर्चा करके, उनके विचारों को बजट में समावेश कर एक ऐसा बजट लाने की कोशिश की जाती है, जो जनता का बजट हो और सही मायने में पूरी की पूरी जनता का प्रतिनिधित्व करता हो। उन्होंने कहा कि हमारे विपक्ष के साथी मध्यप्रदेश सरकार की उपलब्धियों को कमतर आंकने की असफल कोशिश कर रहे थे। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि ‘ पिछले लंबे समय से मैं देखता आ रहा हूं कि विपक्षी साथियों की सुई ऋण पर आकर अटक जाती है। ले देकर उनको मध्यप्रदेश सरकार के ऋण को लेकर बहुत सारी चिंता, बहुत सारी समस्याएं पैदा होती है, यह जो कर्जा लेने की पद्धति है, आप जब सत्ता में थे उस समय जो व्यवस्था थी, उस व्यवस्था के तहत एफआरबीएम जैसी संस्थाओं की वैसी मॉनीटरिंग नहीं थी,वह सीलिंग नहीं लगी हुई थी, तो आप जो भी लोन लेना चाहते थे, लेकिन लोन लेने के लिये कोई भी फायनेंशियल इंस्टीट्यूशन जब आपको लोन देता है, तो आपकी री-पेमेंट करने की कैपेसिटी अवश्य देखता है। संविधान के अनुच्छेद 393(3) के अंतर्गत केन्द्र सरकार की अनुमति से राज्य सरकार ऋण प्राप्त कर सकती है। राज्य की उधार सीमा राज्य के एफआरबीएम अर्थात् मध्यप्रदेश राज्य कोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत केन्द्रीय वित्त आयोग की अनुसंशा एवं भारत सरकार की दी गई सहमति के आधार पर प्रतिवर्ष निर्धारित की जाती है और इस वर्ष के लिये हालांकि यह कुछ आंकड़े मेरे पास हैं। वर्ष 2020-2021 में हमारा यह प्रतिशत् था उधारी की जो सीमा थी, जीएसडीपी के प्रतिशत् के हिसाब से 5 प्रतिशत् थी। इस 5 प्रतिशत् की सीमा को वर्ष 2021-22 में 4 प्रतिशत् किया गया. वर्ष 2022-23 में साढ़े तीन प्रतिशत् किया गया। वर्ष 2023-24 में उसको 3 प्रतिशत् किया गया, जो आज भी 3 प्रतिशत् है, तो हम 3 प्रतिशत् से ज्यादा तो ऋण ले ही नहीं सकते, लेकिन हमारे कुशल प्रबंधन की वजह से ऊर्जा के क्षेत्र में जो कार्य किये हैं, जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उनको ध्यान में रखते हुये आधा प्रतिशत् और अधिक ऋण लेने की क्षमता हमें प्रदान की गई थी और इस प्रकार से यह साढे़ तीन प्रतिशत् और साढ़े तीन प्रतिशत् के अलावा जो विशेष पूंजीगत सहायता केन्द्र सरकार से हमें मिलती है, एक लंबी अवधि का बगैर ब्याज का जो हमें ऋण मिलता है, वह ऐसा लगभग 0.62 प्रतिशत् इसको कुल मिलाकर 4.12 प्रतिशत ऋण लेने की हमारी लिमिट है और हमने वर्ष 2024-25 में हमारी जो ऋण की सीमा है उसको 4.11 प्रतिशत ही रखा है यानि की ऋण लेने की हमारी जो अधिकतम सीमा है उस अधिकतम सीमा से ऋण कम लेने का स्टीमेट किया है,इस कुशल वित्तीय प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश सरकार को बहुत बहुत बधाई देता हूं। वह समय हम भूले नहीं हैं कि किस तरह से कुप्रबंधन के चलते आपको न ऋण मिलता था बात इस बजट में देखने में आयी है वह हमारा पूंजीगत व्यय में लगातार वृद्धि होना। यह सारे के सारे पूंजीगत व्यय की वजह से हुए हैं. आज मध्यप्रदेश में जो सिंचाई का रकबा बढ़ाने का काम हुआ है वह इसी पूंजीगत व्यय की वजह से हुआ है. मैं इस बात के लिए प्रदेश सरकार को और सम्माननीय वित्त मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि पूंजीगत व्यय के मामले में आज तक के इतिहास का अधिकतम पूंजीगत व्यय 60 हजार करोड़ रूपये से अधिक का इस बजट के माध्यम से अनुमानित है. आगे वर्ष 2024-25 के लिए यह हमारा पूंजीगत व्यय 70 हजार करोड़ रूपये से ऊपर का होने का अनुमान है। हमारी प्रति व्यक्ति आय निश्चित रूप से 16 गुना बढ़ी है उदाहरण के लिए देखें तो गेहूं तो गेहूं की कीमत 2003-04 में जो थी वह आज की कीमत में देखी जाय तो तीन से चार गुना ज्यादा की वृद्धि नहीं हुई है। उसके मुकाबले हमारी प्रति व्यक्ति आय लगभग 16 प्रतिशत बढ़ी है। ये जो बजट है, इस बजट में सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है। बजट में परिश्रम, उत्तरदायित्व और भविष्य की संभावनाएं, उन सब का समावेश है











